कवि बप्पादित्य सरकार बोले – थाने पहुंचाने वाले कैब ड्राइवर की भाषा हिंसक और आक्रामक थी

कवि बप्पादित्य सरकार बोले – थाने पहुंचाने वाले कैब ड्राइवर की भाषा हिंसक और आक्रामक थी

कैब में जा रहे एक कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता की सीएए विरोधी-प्रदर्शन के बारे में बातचीत को सुनकर उन्हें पुलिस थाना पहुंचाने वाले कैब ड्राइवर के बारे में कवि बप्पादित्य सरकार ने शुक्रवार को कहा कि ड्राइवर का आक्रामक व्यवहार और उसकी हिंसक भाषा देश के मौजूदा माहौल को प्रदर्शित करता है. सरकार (23) ने यह भी कहा कि उबर ड्राइवर के कृत्य के चलते उन्हें कटु अनुभव हुए, इसके बावजूद वह उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराएंगे क्योंकि इससे उसका करियर और जीवन बर्बाद हो सकता है. सरकार जयपुर के रहने वाले हैं और ‘काला घोड़ा फेस्टीवल’ में कविता पाठ के लिए वह तीन फरवरी को मुंबई आए थे. उन्होंने मुंबई में नागपाड़ा में सीएए-एनआरसी के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. उन्होंने बुधवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे कुर्ला से जुहू जाने के लिए उबर कैब ली थी. यात्रा के दौरान सरकार अपने दोस्त से मोबाइल पर दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन के बारे में बात कर रहे थे. ड्राइवर उनकी बातें सुन रहा था और उसने कैब रोककर सरकार को कहा कि वह एटीएम से पैसे निकालना चाहता है. लेकिन लौटने पर उसके साथ दो पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने कथित रूप से सरकार से पूछा कि उनकी पास ‘डफली’ क्यों है और उनका पता भी पूछा.

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ड्राइवर ने पुलिस से सरकार को कथित रूप से हिरासत में लेने को कहा क्योंकि उन्होंने खुद को कम्युनिस्ट बताया था और उसके मुताबिक वह देश जलाने की बात कर रहे थे. ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णनन ने घटना के बारे में ट्वीट किया. उनके ट्वीट के अनुसार पुलिस ने सरकार को डफली नहीं रखने या गले में लाल कपड़ा नहीं पहनने की सलाह दी क्योंकि ‘‘माहौल ठीक नहीं है और कुछ भी हो सकता है.’

सरकार ने शुक्रवार को बातचीत में कहा, ‘ड्राइवर का बर्ताव आक्रामक था और उसकी भाषा हिंसक थी. इस तरह की हिंसक भाषा यह दिखाती है कि देश में क्या कुछ हो रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘ड्राइवर ने धमकी दी कि वह मुझे कहीं और ले जा सकता था, लेकिन मुझे पुलिस थाना ले आया. उसकी धमकी से मैं डरा हुआ था. इस धमकी को लेकर ड्राइवर के पास निश्चित रूप से कुछ आधार रहा होगा.’ सरकार ने कहा कि वह कुर्ला में एक मित्र के साथ रह रहे थे, लेकिन घटना के बाद वह अंधेरी चले गए. उन्होंने कहा, ‘मैं एक छात्र हूं और मुझे कविताएं लिखना, नारे गढ़ना और नारे लगाना पसंद है. समूचे देश में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान मैं भी अपने घर में रह सकता था लेकिन अपने लोगों और देश के प्रति जिम्मेदारी के कारण मैं बाहर निकला.’  मुंबई आने से पहले सरकार ने दिल्ली के शाहीन बाग और जयपुर में प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया था। सरकार शुक्रवार सुबह नागपाड़ा में ‘मुंबई बाग’ प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे. उन्होंने कहा दोपहर तक अपने गृहनगर जयपुर पहुंचेंगे जहां वह इसी तरह के प्रदर्शनों में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा, ‘जयपुर जाकर सबसे पहले मैं परिवार वालों से मिलूंगा क्योंकि वे (घटना के बाद) चिंता में हो सकते हैं. इसके बाद मैं प्रदर्शनों में हिस्सा लूंगा.’

 

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