ओवैसी की इस हलचल से सियासी पार्टियों में खलबली,सपा बसपा की बढ़ी चिंता,देखिए

नई दिल्ली: देशभर में अल्पसंख्यक समुदाय की सबसे मजबूत आवाज माने जाने वाले बैरिस्टर असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तिहादुल मुस्लिमीन धीरे धीरे पूरे देश मे अपनी पकड़ मजबूत बनाती जारही है।

बिहार महाराष्ट्र के बाद अब ओवैसी की निगाहें उत्तर प्रदेश पर हैं,क्योंकि यहां मुसलमानों की वोट बड़ी संख्या में हैं,यूपी में मुस्लिमों की आबादी 19 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश की कुल मुस्लिम आबादी तकरीबन 19 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। शहरों में 32 फीसदी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

राज्य के उत्तरी इलाके मुस्लिम बहुल हैं। बाबरी विध्वंस के बाद से सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटों का लाभ मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को मिला है। लेकिन, पिछले कुछ चुनावों से मुसलमानों का मुलायम से मोहभंग भी होता नजर आया है।

इसके बाद उनका रुझान बसपा की ओर हुआ। हालांकि यहां अभी तक की तमाम क्षेत्रीय पार्टियां कोई कुछ खास नहीं कर पाई हैं।

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में चार सीटें जीतकर चौंकाने वाली पीस पार्टी भी पानी का बुलबुला साबित हुई। उलेमा कांउसिल, कौमी एकता दल एक ही परिवार और चेहरे की पार्टी रही हैं। लेकिन ये कुछ खास नहीं कर पाई हैं, न ही कोई बड़ी लीडरशिप तैयार कर पाई हैं।

उपचुनाव में ओवैसी ने सभी को चौंकाया
अभी हाल में हुए उपचुनावों में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने एक सीट पर ही चुनाव लड़कर 20 हजार से अधिक वोट बटोरे और इससे सपा, बसपा और कांग्रेस का हिसाब गड़बड़ा दिया।

इतना ही नहीं, प्रदेश में अल्पसंख्यक वर्ग केंद्रित राजनीति कर रही पीस पार्टी जैसे स्थानीय दलों को पीछे धकेल दिया है।

This post appeared first on The Inquilaab http://theinquilaab.com/ POST LINK Source Syndicated Feed from The Inquilaab http://theinquilaab.com Original Link- Source

اپنی رائے یہاں لکھیں

Discover more from ورق تازہ

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading