
अमेरिका ने हिज्बुल्लाह की वजह से लेबनान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं. यदि हिजबुल्लाह अमेरिका के खिलाफ लड़ने का फैसला लेता है तो लेबनान की हालत भी वेनेजुएला जैसी हो सकती है.
Lebanon's prime minister gave over $16 million to a South African model who said they had a relationship, according to records obtained by The Times. No laws appear to have been broken, but the revelation comes as Lebanon faces a looming financial crisis. https://t.co/J2QiQk33BC
— The New York Times (@nytimes) September 30, 2019
अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव पैदा कर दिया है. लेबनान भी अब इसकी चपेट में आ गया है. यहां अमेरिका ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह पर प्रतिबंध लगा दिया है. जल्द ही वह प्रतिबंधों को उसके और सहयोगियों पर भी लागू कर सकता है.
U.S. to deprive Hezbollah of all financial support, whether from #Iran or through any other means! https://t.co/sksEMUUUXL
— Nasrin Saifi (@NassrinSaifi) October 4, 2019
ट्रंप प्रशासन ने लेबनानी चरमपंथी संगठन और उससे जुड़े संस्थानों पर प्रतिबंधों को तेज कर दिया है. पहली बार सांसदों के साथ-साथ स्थानीय बैंक को भी निशाना बनाया गया है. अमेरिका दावा करता आया है कि ये चरमपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं. प्रतिबंध से अरब के इस छोटे से देश में भी आर्थिक संकट गहरा सकता है.
#Hezbollah Stresses Gov't Must Confront #US Intervention in #Lebanon's Financial Situation https://t.co/TzTT6P79qI#Lebanon pic.twitter.com/Gzm3GqXbHf
— Almanarnews English (@AlmanarEnglish) October 4, 2019
अमेरिका के दो अधिकारी सितंबर महीने में बेरूत गए थे और चेतावनी दी थी कि प्रतिबंधों के माध्यम से हिज्बुल्लाह के आय के स्रोत को बाधित किया जाएगा.
Moody’s puts Lebanon under review for downgrade as monetary crisis deepens https://t.co/pOMpUrRyA6
— Financial Times (@FT) October 1, 2019
अमेरिका के इस कदम से लेबनान गंभीर आर्थिक और वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है. लेबनान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि देश आर्थिक और बैंकिंग सेक्टर में इतना दबाव नहीं झेल सकता है.
पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिका में आतंकवाद और वित्तीय खुफिया जानकारी विभाग में अंडर सेक्रेटरी ने कहा था, “हमने हाल ही में हिज्बुल्लाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है.
यह आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम के इतिहास में की गई सबसे बड़ी कार्रवाई है. अमेरिका इस बात के लिए निश्चिंत है कि लेबनान सरकार और वहां की केंद्रीय बैंक ऐसा काम करेगी जिससे यह सुनिश्चित हो कि हिज्बुल्लाह, बैंक से किसी तरह से पैसा प्राप्त न कर सके.”
जानिए, क्या है हिज्बुल्लाह का इतिहास
हिज्बुल्लाह का अरबी में अर्थ होता है ‘भगवान का दूत’. इसकी स्थापना 1982 में इस्रायल द्वारा लेबनान पर हमले के बाद ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड द्वारा की गई थी.
इस समूह को लेबनान के शिया समुदाय का समर्थन प्राप्त है. समूह द्वारा अस्पताल, स्कूल जैसे संस्थाएं भी चलाई जाती है. यह आज मध्य पूर्व में एक काफी प्रभावशाली समूह बन गया है. इसके पास लेबनान की सेना से ज्यादा हथियार हैं.
सीरिया में गृह युद्ध के समय इसने राष्ट्रपति बसर अल असद की सहायता के लिए अपने लड़ाकों को भेजा. हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगियों की पकड़ संसद और सरकार में पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है. यह राष्ट्रपति मिषेल आउन का एक मजबूत सहयोगी है.
हिज्बुल्लाह को यह जानकारी मिल चुकी है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वह प्रभावित हो रहा है. इसके बावजूद समूह का कहना है कि वह कई सालों तक इस प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार है.
समूह ने चेतावनी दी है कि लेबनान की सरकार का यह दायित्व है कि वह इन प्रतिबंधों में नागरिकों की रक्षा करे. ये समूह से जुड़े नागरिक या तो शिया समुदाय के हैं या फिर इनके अंदर हिजबुल्लाह के प्रति सहानुभूति है.
जुलाई महीने में वित्त विभाग ने हिज्बुल्लाह के दो सांसदों अमीन शेरी और मोहम्मद राद को निशाना बनाया था. यह पहली बार था जब लेबनान की संसद के वर्तमान सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की गई.
एक महीने बाद ट्रेजरी ऑफिस ऑफ द फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने जमाल ट्रस्ट बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके पीछे वजह बताई गई “जान बूझ कर बैंकिंग गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना.” जब बैंक ने किसी तरह का शुल्क देने से मना कर दिया तो उसे बंद कर दिया.
हालांकि इस पूरे मामले पर ना तो शेरी और ना ही राद ने किसी तरह की प्रतिक्रिया दी. अब तक जिनके ऊपर प्रतिबंध लगाया गया है कि वह या तो हिज्बुल्ला अधिकारी हैं या फिर शिया मुस्लिम जिनके बारे में अमेरिका कहता है कि ये उन संगठनों से जुड़े हुए हैं.
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