अमेरिका ने हिज्बुल्लाह की वज़ह से लेबनान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाना शुरू किया!

अमेरिका ने हिज्बुल्लाह की वज़ह से लेबनान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाना शुरू किया!

अमेरिका ने हिज्बुल्लाह की वजह से लेबनान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं. यदि हिजबुल्लाह अमेरिका के खिलाफ लड़ने का फैसला लेता है तो लेबनान की हालत भी वेनेजुएला जैसी हो सकती है.

अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव पैदा कर दिया है. लेबनान भी अब इसकी चपेट में आ गया है. यहां अमेरिका ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह पर प्रतिबंध लगा दिया है. जल्द ही वह प्रतिबंधों को उसके और सहयोगियों पर भी लागू कर सकता है.

ट्रंप प्रशासन ने लेबनानी चरमपंथी संगठन और उससे जुड़े संस्थानों पर प्रतिबंधों को तेज कर दिया है. पहली बार सांसदों के साथ-साथ स्थानीय बैंक को भी निशाना बनाया गया है. अमेरिका दावा करता आया है कि ये चरमपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं. प्रतिबंध से अरब के इस छोटे से देश में भी आर्थिक संकट गहरा सकता है.

अमेरिका के दो अधिकारी सितंबर महीने में बेरूत गए थे और चेतावनी दी थी कि प्रतिबंधों के माध्यम से हिज्बुल्लाह के आय के स्रोत को बाधित किया जाएगा.

अमेरिका के इस कदम से लेबनान गंभीर आर्थिक और वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है. लेबनान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि देश आर्थिक और बैंकिंग सेक्टर में इतना दबाव नहीं झेल सकता है.

पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिका में आतंकवाद और वित्तीय खुफिया जानकारी विभाग में अंडर सेक्रेटरी ने कहा था, “हमने हाल ही में हिज्बुल्लाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है.

यह आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम के इतिहास में की गई सबसे बड़ी कार्रवाई है. अमेरिका इस बात के लिए निश्चिंत है कि लेबनान सरकार और वहां की केंद्रीय बैंक ऐसा काम करेगी जिससे यह सुनिश्चित हो कि हिज्बुल्लाह, बैंक से किसी तरह से पैसा प्राप्त न कर सके.”

जानिए, क्या है हिज्बुल्लाह का इतिहास
हिज्बुल्लाह का अरबी में अर्थ होता है ‘भगवान का दूत’. इसकी स्थापना 1982 में इस्रायल द्वारा लेबनान पर हमले के बाद ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड द्वारा की गई थी.

इस समूह को लेबनान के शिया समुदाय का समर्थन प्राप्त है. समूह द्वारा अस्पताल, स्कूल जैसे संस्थाएं भी चलाई जाती है. यह आज मध्य पूर्व में एक काफी प्रभावशाली समूह बन गया है. इसके पास लेबनान की सेना से ज्यादा हथियार हैं.

सीरिया में गृह युद्ध के समय इसने राष्ट्रपति बसर अल असद की सहायता के लिए अपने लड़ाकों को भेजा. हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगियों की पकड़ संसद और सरकार में पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है. यह राष्ट्रपति मिषेल आउन का एक मजबूत सहयोगी है.

हिज्बुल्लाह को यह जानकारी मिल चुकी है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वह प्रभावित हो रहा है. इसके बावजूद समूह का कहना है कि वह कई सालों तक इस प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार है.

समूह ने चेतावनी दी है कि लेबनान की सरकार का यह दायित्व है कि वह इन प्रतिबंधों में नागरिकों की रक्षा करे. ये समूह से जुड़े नागरिक या तो शिया समुदाय के हैं या फिर इनके अंदर हिजबुल्लाह के प्रति सहानुभूति है.

जुलाई महीने में वित्त विभाग ने हिज्बुल्लाह के दो सांसदों अमीन शेरी और मोहम्मद राद को निशाना बनाया था. यह पहली बार था जब लेबनान की संसद के वर्तमान सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

एक महीने बाद ट्रेजरी ऑफिस ऑफ द फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने जमाल ट्रस्ट बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके पीछे वजह बताई गई “जान बूझ कर बैंकिंग गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना.” जब बैंक ने किसी तरह का शुल्क देने से मना कर दिया तो उसे बंद कर दिया.

हालांकि इस पूरे मामले पर ना तो शेरी और ना ही राद ने किसी तरह की प्रतिक्रिया दी. अब तक जिनके ऊपर प्रतिबंध लगाया गया है कि वह या तो हिज्बुल्ला अधिकारी हैं या फिर शिया मुस्लिम जिनके बारे में अमेरिका कहता है कि ये उन संगठनों से जुड़े हुए हैं.

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