
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वह चंद दिनों में ही धरती से अफगानिस्तान का नामोनिशान मिटा सकते हैं लेकिन इसके बजाए वह बातचीत को तरजीह देते हैं। इससे अफगानिस्तान में नाराजगी फैल गई और इस विचित्र टिप्पणी पर उसने स्पष्टीकरण मांगा।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से ओवल कार्यालय में सोमवार को मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा, अगर मैं उस युद्ध को जीतना चाहता, तो अफगानिस्तान धरती से मिट जाता। यह 10 दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन मैं एक करोड़ लोगों को नहीं मारना चाहता।
उन्होंने कहा, हम 19 साल से वहां हैं और हमने पुलिसकर्मियों के रूप में काम किया है, सैनिकों की तरह नहीं। उन्होंने कहा, अगर हम सैनिकों की तरह काम करना चाहते तो हम इसे एक हफ्ते, 10 दिनों में समाप्त कर सकते थे। उन्होंने उस परिमाण की एक सैन्य योजना पर कहा, “मैं वह रास्ता नहीं अपनाना चाहता।
उन्होंने कहा, “इसलिए हम स्वयं को वहां से निकालने के लिए पाकिस्तान व अन्य के साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका अफगान युद्ध को खत्म करने के लिए एक कूटनीतिक रणनीति का अनुसरण कर रहा है। इसके तहत कतर में अमेरिका व तालिबान में वार्ता हो रही है। इसके साथ ही वह तालिबान पर अभी भी सैन्य दबाव बनाए हुए है।
ट्रंप ने अफगानिस्तान में युद्ध की लंबी अवधि को ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान युद्ध को खत्म करने में मदद करेगा। यह टिप्पणी भी परोक्ष रूप से अफगान सरकार के लिए चुभने वाली हो सकती है।
ट्रंप की टिप्पणी के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन ने कहा, अफगानिस्तान व अमेरिका के बीच बहुआयामी संबंधों को देखते हुए अफगानिस्तान सरकार, अमेरिका के राष्ट्रपति की टिप्पणी पर स्पष्टीकरण की मांग करती है।
टोलो न्यूज ने बयान के हवाले से कहा, “अफगानिस्तान दुनिया के सबसे प्राचीन देशों में से एक है और इतिहास के अनगिनत संकटों से पार पाने में सक्षम रहा है। अफगानिस्तान राष्ट्र ने कभी किसी विदेशी शक्ति को अपने भाग्य का निर्धारण करने की अनुमति न तो दी है और न ही देगा।
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