नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने इस्लामिक सहयोगी संगठन की एक बैठक में मुस्लिम देशों से आर्थिक स्थिरता और कल्याण के स्तर में सुधार कर लोगों के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि सभी लोग जरूरतमंदों की मदद करने के लिए इस्लामी सिद्धांत का पालन करते हैं तो यह संभव है।
रविवार को इस्तांबुल में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की एक बैठक को संबोधित करते हुए, एर्दोआन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुस्लिम देश अपने लोगों के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहे हैं।
एर्दोआन ने कहा कि “ओआईसी सदस्य राज्यों में रहने वाली 21% आबादी, लगभग 350 मिलियन मुस्लिम लोगों के बराबर है, जो अत्यधिक गरीबी की स्थिति में हैं। ऐसे में मुस्लिम देशों को कठिन और खुलकर चर्चा करने की जरूरत है।

उन्होने कहा, “सबसे अमीर मुस्लिम देश और गरीबों के बीच का अंतर लगभग 200 गुना है। अगर मुसलमान इस्लाम के चौथे स्तंभ के अनुसार जकात देते हैं, तो मुस्लिम देशों में कोई गरीब नहीं होगा। ”
तैयब एर्दोगान की गिनती दुनिया के सबसे ज़्यादा शक्तिशाली मुस्लिम शासक के रूप में होती है जो हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हैं और मुस्लिम अधिकारों का पक्ष मज़बूती के साथ दुनिया के सामने उठाते हैं।
एर्दोगान ने फलिस्तीन से लेकर कश्मीर और रोहंगिया मुसलमानों की आवाज़ सँयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाई है,कश्मीर के मुद्दे पर एर्दोगान और भारत के रिश्तों में खटास आगई थी जिसके कारण दोनों देशों के सम्बंध अब अच्छे नही हैं।
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