
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की अंतिम लिस्ट असम में जारी होने के बाद यह साफ हो गया कि कौन भारत का नागरिक है और कौन विदेशी या बाहरी है. लेकिन इस लिस्ट के जारी होने बाद बिहार और प.बंगाल में भी एनआरसी की लिस्ट जारी करने की मांग हो रही है। इसे लेकर राजनीति भी तेज हो गई है।
एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) का असम में अंतिम लिस्ट जारी कर दिया गया है। वहीं, इसको लेकर पूरे देश में राजनीति हो रही है और बिहार एवं बंगाल में भी लिस्ट जारी करने की मांग बढ़ती जा रही है।
बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने एनआरसी के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछली बार और इस बार में जो आंकड़े आए हैं उसमे काफी अंतर है। इसे लेकर बीजेपी के लोगों को ही एतराज है। आंकड़ों का जो रजिस्टर है वह सही नहीं है।
न्यूज़ ट्रैक पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने कहा कि बीजेपी की इच्छा थी कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम बाहर जाए लेकिन हिंदुओं की संख्या ज्यादा वहां हो गई है और यह मांग उठ रही है जिस इलाकों में जो लोग बाहर से आए हैं उनका भी लिस्ट बनना चाहिए। खासकर के बिहार के सीमांचल इलाकों का अब नाम आ रहा है इसके कारण हरेक जगह उपद्रव होगा।
बाहर के लोग जरूर आए होंगे क्योंकि पूरी दुनिया में ऐसे हालात हैं कि लोग एक दूसरे देश में चले जाते हैं और यहां भी हुआ होगा। लेकिन इसमें कुछ कोई नहीं कर पाएगा।
इसका एक ही तरीका है कि अब लोगों को नहीं आने दिया जाए या सीमा पर काफी चौकसी रखी जाए। चूंकि हमारा तंत्र भ्रष्ट है और इसमें उम्मीद कि करना सही-सही डाटा बन जाए ये संभव नहीं है।
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