
असम के संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने सोमवार को बताया कि इस साल 31 मार्च तक फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स ने 1 लाख 17 हजार 164 विदेशियों की पहचान की है। असम गण परिषद के विधायक रामेन्द्र नारायण कलिता के सवाल के लिखित जवाब में पटवारी ने बताया कि 1985 से 30 जून 2019 के बीच कुल 29 हजार 855 विदेशियों को निर्वासित किया गया है।
डेली न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने बताया कि राज्य में फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स पर 2005-06 से 2018-19 के दौरान कुल 168.02 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसमें से केन्द्र का योगदान 81.94 करोड़ रुपए है।
कलिता ने पूछा कि एनआरसी अपडेशन की प्रक्रिया पर कुल कितने पैसे खर्च हुए हैं और केन्द्र ने कितना अमाउंट जारी किया है, इस पर पटवारी ने बताया कि केन्द्र ने कुल 1,288.13 करोड़ रुपए रिलीज किए हैं इसमें से 1,243.53 करोड़ रुपए अभी तक खर्च हुए हैं।
पटवारी परिवहन और उद्योग मंत्री भी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की ओर से जवाब दिया, जिनके पास असम समझौते को लागू करने का विभाग है। आपको बता दें कि असम में एनआरसी के अपडेशन की प्रक्रिया चल रही है।
विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए ये एक्सरसाइज हो रही है। सारी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग में हो रही है। उच्चतम न्यायालय ने फाइनल एनआरसी के प्रकाशन की डेडलाइन 31 अगस्त तय की है। ड्राफ्ट एनआरसी में कुल 40 लाख लोगों के नाम नहीं थे। इनमें से 4 लाख ने आपत्तियां और दावे दर्ज नहीं कराए हैं।
उधर असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए तीन साल से हिरासत केन्द्रों में रह रहे विदेशियों को रिहा करने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने रिहाई के लिए कुछ शर्तें रखी है। इन शर्तों को पूरा करने वाले ही हिरासत केन्द्रों से रिहा हो पाएंगे।
आपको बता दें कि हिरासत केन्द्रों में में रह रहे लोगों की कथित दयनीय स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। 10 मई को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने हिरासत केन्द्रों में रह रहे विदेशी नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया था।
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