नई दिल्ली: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी हलचल तेज होती जारही है,जैसे जैसे चुनाव का समय करीब आरहा है सूबे की सियासत में हलचल बढ़ने लगी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि (Nagmani) ने अब बैकवर्ड कास्ट, दलित जाति, गरीब सवर्ण और मुसलमानों को एक करने की रणनीति पर चलने का ऐलान करते हुए बड़ा ऐलान किया है. नागमणि ने कहा कि वो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में शामिल होंगे।
उन्होंने दावा किया है कि उनकी देवेंद्र यादव (Devendra Yadav) और पूर्णमासी राम (Purnmasi Ram) जैसे नेताओं से बात हो चुकी है और ये दोनों भी असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन यानी AIMIM में जल्द शामिल हो जाएंगे।

नागमणि ने ओवैसी को देश के मुसलमानों का सबसे बड़े नेता बताते हुए कहा कि हमारी पार्टी की लड़ाई सीधे बीजेपी से होगी. उन्होंने कुशवाहा जाति से सीएम बनाने की बात रखते हुए कहा कि कुशवाहा समाज को मुख्यमंत्री पद की भूख लगी है, इस समाज का मुख्यमंत्री क्यों नहीं होगा?
नागमणि ने एक विवादित बयान भी दे डाला. उन्होंने कहा कि बिहार में लालू और नीतीश कुमार को जनता 15-15 साल देख चुकी है, अब ये लोग ‘हेमा मालिनी’ नहीं हैं कि बिहार की जनता इन्हें देखती रहेगी.
नागमणि के AIMIM में शामिल होने की बात पर आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि ऐसी कोई पार्टी नहीं बची है जहां नागमणि नहीं गए हों और उन्हें वहां से नहीं निकाला गया हो. वो दंतहीन विषहीन नाग हैं, उनको ओवैसी की पार्टी से भी दो-चार महीने में निकाल दिया जाएगा।
बता दें कि इससे पहले ये बात सुर्खियों में रही थी कि ओवैसी बिहार में दलित और मुस्लिम गठजोड़ बनाना चाहते हैं. इसी क्रम में बीते दिसंबर में वो पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के साथ रैली करने वाले थे. हालांकि बाद में मांझी उस रैली में नहीं गए थे.
बहरहाल अब नागमणि, देवेंद्र यादव और पूर्णमासी राम जैसे नेताओं के बहाने ओवैसी ये दिखाना चाहते हैं कि उनकी पार्टी AIMIM सर्वसमाज की पार्टी है और ये बिहार में अपनी खास रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
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