
गुवहाटी : असम में जारी NRC की फाइनल लिस्ट को लेकर कोहराम जारी है। इनमें आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के परिवार के नाम भी गायब हैं। भारत के 5वें राष्ट्रपति फख़रुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों का नाम भी शामिल नहीं है। 32 साल के अब्दुल समद चौधरी का नाम भी एनआरसी की फ़ाइनल लिस्ट में नहीं है। समद चौधरी असम के मुस्लिम नेता बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट के लीडर हैं। समद चौधरी के दादा ब्रिटिश आर्मी में सैनिक थे, लेकिन आज़ादी की लद्दाई के दौरान वे अंग्रेज़ से लड़े थे। समद कहते हैं की उनकी माँ और उनकी बहन का नाम तो लिस्ट में है, लेकिन उनका, उनकी दो बहनों का और उनके एक भाई का नाम लिस्ट से बाहर है।
ऐसी ही कहानी है 62 साल के जमाल हुसैन की। जमाल हुसैन डाक विभाग से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन एनआरसी में उनका नाम नहीं है। असम के कामरूप जिले के गरियागाँव के रहने वाले जमाल हुसैन ने कहा ‘मैं दो बार इस प्रक्रिया एन शामिल हुआ, लेकिन मेरा नाम लिस्ट में नहीं है, जबकि मेरी पत्नी का नाम, मेरे भाई का नाम इसमें है।
असम आंदोलन में जान गवाने वाले मदन मालिक की पत्नी का नाम एनआरसी सूची में नहीं है। 66 वर्षीय सरब्बाला सरकार कहती हैं की मेरे पति की जान विदेशियों को असम से खदेड़ने में असम आंदोलन में गई थी। विरोधियों ने मेरे पति का सिर काट दिया था, उनके बलिदान के कारण एनआरसी बनी और मेरा नाम काट दिया गया। अखिल असम छत्र संघ ने मदन के नाम पर शहीद स्मारक भी बनवाया है।
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