1971 से रह रहे सभी शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक दिया जायेगा- ममता बनर्जी

1971 से रह रहे सभी शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक दिया जायेगा- ममता बनर्जी

सीएम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य में सभी शरणार्थी बस्तियों को रेग्युलराइज किया जाएगा। इसका मतलब है कि शरणार्थी के तौर पर रह रहे लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा।

जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा कि 1971 से ही ये अधर में लटके हुए हैं और ना तो इनके पास जमीन है और ना ही घर। मेरा मानना है कि यह शरणार्थियों का हक है। इस पर भाजपा ने कहा है कि ममता अवैध प्रवासियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं।

ममता ने सोमवार को कहा कि प्राइवेट पार्टी और केंद्र सरकार की जमीन पर बनी शरणार्थी बस्तियों को रेग्युलराइज करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विस्थापित हुए लोगों को भी राज्य सरकार की ओर से जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा।

ममता का बयान ऐसे समय में आया है, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को पूरे देश में लागू किया जाएगा। ममता के इस बयान को लेकर भाजपा ने सख्त नाराजगी जताई है।

भाजपा ने कहा है कि ममता की सरकार वोटबैंक के लिए अवैध प्रवासियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं। सोमवार को हुई राज्य सरकार की कैबिनेट मीटिंग के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार की जमीन पर बसी 94 शरणार्थी बस्तियों को रेग्युलराइज किया जा चुका है।

ममता ने आगे कहा, कई बस्तियां केंद्र सरकार और प्राइवेट पार्टी की जमीन पर बसी हुई हैं। हम लंबे समय से कह रहे हैं कि इन बस्तियों को भी रेग्युलराइज करके लोगों को जमीन का अधिकार दिया जाए। हालांकि, लोगों को जमीन खाली करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं।

राज्य के पूर्व मंत्री व वामपंथी नेता क्षिति गोस्वामी के निधन पर राज्य सरकार ने सोमवार को सभी सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी हुई। सोमवार तो शाम तीन बजे राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद हो गए।

सोमवार को राज्य सचिवालय नवान्न से इस बाबत एक संदेश चला, जिसमें सभी सभी कार्यालयों को पूर्व मंत्री क्षिति गोस्वामी की याद में आधे दिन की छुट्टी देने का निर्देश दिया गया।

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