नाज़िश हुमा क़ासमी
(मुंबई उर्दू न्यूज़/बसीऱत ऑनलाइन)
हिंदी रूपांतरण : ताहा जौनपुरी
हां, 18 वर्षीय मुस्लिम परिवार की रहफ़ अल-क़नून हूँ। मैं मुस्लिम परिवार में पली बढ़ी, परवान चढ़ी, विद्रोही, इस्लाम धर्म छोड़ने वाली, गैर-लोगों के हाथों में खिलौना बनने वाली, पूरी दुनिया में इस्लाम का मज़ाक़ उड़ाने वाली, सूअर का गोश्त खाने वाली रहफ़ अल-क़नून हूँ। इस्लाम से मेरे विद्रोह और छोड़ने में मेरे परिवार का एक बड़ा हाथ है। मेरी ट्रेनिंग फ़ातिमा ज़हरा और राबिया बसरिया की तरह नहीं हुयी। मैं निश्चित रूप से एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुई थी लेकिन मेरे परिवार में इस्लाम सिर्फ़ नाम का है, इसलिए मेरे अंदर भी इस्लाम प्रवेश नहीं हो सका और मैंने परिवारिक इस्लाम के ख़िलाफ़ विद्रोह किया और अरबी में ट्विटर पर अपनी कहानी को लिखा, जिसको मिस्र की एक महिला पत्रकार ने इंग्लिश में कर के वायरल कर दिया और मैं पूरी दुनिया की तवज्जो का मरकज़ बन गयी। दज्जाली सत्ता मुझे सऊदी अरब से बचाने के लिए कूद पड़ीं और कनाडा ने मुझे शरणार्थी के रूप में पहचाना और अपनी नागरिकता के प्रबंधन में कामयाब रही। मैं कोई हसीना नहीं, जिसके हुस्न पर लट्टू हुआ जाए, जिसके लिए इतनी मेहनत की जाए लेकिन मेरे नाम से इस्लाम की एक झलक थी, इसलिए बातिल ताक़तों और इबलीस के संघों ने मुझ पर झूठा रहम खाया था और इस्लाम को बदनाम करने के लिए, मुझ विद्रोही यानी इस्लाम धर्म छोड़ने वाली को इस्लाम के ख़िलाफ़ बग़ावत करने की हिम्मत दी और एक बहादुर नई कनाडाई लड़की से ताबीर किया। हालांकि अगर मैं इस्लाम को छोड़ने वाली ना होती तो मुझको भी अन्य मुस्लिम शरणार्थियों की तरह खाने पीने से रोक दिया जाता। मुझे जेल में बंद कर दिया जाता लेकिन मैं विद्रोही यानी इस्लाम धर्म को छोड़ने वाली थी, सरकश थी क्योंकि मैं उनके मतलब की थी इसलिए मेरी आवभगत, इज़्ज़त की गयी, और बड़े पैमाने पर कुहराम मचा कर इस्लाम और मुसलमान को बदनाम किया गया। मेरा जन्म 11 मार्च 2000 को सऊदी अरब के उच्च श्रेणी परिवार में हुआ था, मेरे पिता सऊदी सरकार में एक प्रमुख कार्यालय में विराजमान हैं। मेरे नौ भाई बहन हैं। उच्च श्रेणी के घर में पैदा होने के कारण, मेरा प्रशिक्षण यानी देखभाल बादशाही वाली हुई। नौकर हमारी सेवा करते थे। शाह मुहम्मद इब्न सलमान के नए इस्लाम के नारे से मैं प्रभावित हुई और महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के पश्चिमी खोखले नारे को अपना कर अपने घर के ख़िलाफ़ बग़ावत किया। इस्लाम धर्म से हाथ धो बैठी और आज मैं काफ़िरों की गोद में जाकर, इस्लाम और मुसलमानों को रुसवा और बेइज़्ज़त करने का कारण बन चुकी हूँ। मुझे अपने इस्लाम धर्म को छोड़ने पर कोई पछतावा नहीं है, मुझे आज़ादी चाहिए थी, ऐसी आज़ादी जहाँ लड़कियां को बिला रोक-टोक बाहर घूमने की, मुहब्बत की शादी करने की,आज़ादी चाहिए थी और मुझे ये स्वतंत्रता इस्लाम और सऊदी अरब में रह कर मिलना संभव नहीं। इसलिए मैं एक काम करने के औजार के तौर पर इस्तेमाल हुई और नाटकीय रूप से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया, और ‘सेव -रहफ’ का मीडिया आंदोलन चलाया गया, और मुझे कनाडा की एक बहादुर लड़की के रूप में पेश किया गया।

हाँ! मैं वही रहफ़ अल-क़नून हूं, जिसने कनाडा की नागरिकता प्राप्त करने और विदेश मंत्री क्रिस्टी फ्रीलैंड से मिलने पर खूब खुशी का इज़हार किया और ख़ुद को पुनः जन्म पाने वाली बताया। मेरे मुंह से खुशी के साथ यह जुमले निकले, ‘मुझे लगता है कि मैं फिर से पैदा हुई हूं’, यह एक महान देश है, यहां बहुत प्यार और सम्मान है, यहां एक मंत्री ने मेरा स्वागत किया और मुझे आश्वासन दिया कि मैं यहां बिल्कुल सुरक्षित हूं और यहां मेरे पास सभी अधिकार हैं जो सऊदी अरब और इस्लाम में नहीं हैं। हां मैं वही रहफ़ अल-क़नून हूं जो सुअर के मांस को बहुत खुशी के साथ स्वीकार करती हूँ और अपने सुअर होने की पुष्टि करती हूँ। हां, मैं इस्लाम का मज़ाक़ उड़ाने के लिए भी शराब पी रही हूं, क्योंकि इस्लाम में शराब हराम है लेकिन मैं इस्लाम धर्म छोड़ चुकी हूँ, तो इस्लामिक कानून को मैं क्यों मानूँ ?
