‘यस बैंक संकट’ का जिम्मेदार राणा कपूर है, जो मोदी को अर्थशास्त्री और नोटबंदी को अच्छा बताता था

अवंतिका 

यस बैंक वित्तीय संकट से गुज़र रहा है. इस संकट के खत्म होने के कोई आसार अभी तो नज़र नहीं आ रहे हैं. यस बैंक ने ग्राहकों के लिए 50 हज़ार रुपए निकालने की सीमा तय कर दी है. अब एक महीने में ग्राहक 50 हज़ार रूपए तक ही निकाल सकते हैं.

ग्राहकों में इस निर्णय के बाद काफी नाराज़गी है. बैंक ने ज़्यादातर ऐसी ही कंपनियों को पैसा दे रखा है, जिनकी भी स्थिति खस्ताहाल है. कौन सी कंपनियों को लोन बांटा? यस बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया है, उनका इतिहास और मौजूदा स्थिति बेहाल है.

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इन सभी कंपनियों का वित्तीय लेखा-जोखा साफ नहीं है. इस लिस्ट में एलएंडएफएस, दीवान हाउसिंग, जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, सीजी पावर और कैफे कॉफी डे जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें यस बैंक ने लोन दिया.  इन सभी कंपनियों का एन.पी.ए दर रिकॉर्ड पर है.

शेयर बाज़ार में यस बैंक की हालत!

यस बैंक शेयर बाज़ार में भी अपनी सबसे खराब स्थिति से गुज़र रहा है. कभी जो शेयर 1400 रूपए का बिकता था, उसका मूल्य गिरते- गिरते मात्र 36 रूपए हुआ. आज की तारीख में यस बैंक के शेयर की कीमत 13 रुपए है. जो यस बैंक गुरूवार को स्टॉक मार्केट में 36.85 रुपए के भाव पर बंद हुआ, वो आज शुक्रवार को 85 फीसदी नीचे गिरकर 5.55 रुपए हो गया.

क्या है राणा कपूर का मामला?

राणा कपूर भारतीय कॉर्पोरेट वर्ल्ड के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं. यस बैंक की शुरूआत 2004 में राणा कपूर ने अपने एक रिश्तेदार के साथ मिलकर की थी. 1000 से ज़्यादा शाखाओं और 1800 से ज़्यादा ए.टी.एम वाला यस बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा निजी बैंक है.

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राणा कपूर ने 2016 में मोदी सरकार द्वारा लायी गई नोटबंदी के लिए तारीफ की झड़ी लगा दी थी. साल 2018 में आर.बी.आई को येस बैंक की बैलेंस शीट और एन.पी.ए में गड़बड़ी लगी. इसलिए राणा कपूर को आर.बी.आई ने हटा दिया था. राणा के हटने के बाद भी यस बैंक की स्थिति और भी गिरती गई. सरकार जब विनिवेश के नशे में मशगूल है, तब देश के निजी बैंकों की हालत पस्त है!

एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने येस बैंक के ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि ये संकट जल्दी ही खत्म होगा. वहीं दूसरी तरफ सरकार 28 पी.एस.यू को बेचने को तैयार बैठी है. निजी क्षेत्र की कंपनियां एक के बाद एक धराशायी हो रही हैं. पर सरकार को अभी भी निजीकरण का भूत सवार है. जेट एयरवेज़, पी.एम.सी बैंक, एयर इंडिया और अब येस बैंक इसके गवाह हैं. इस लिस्ट की भविष्य में बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हैं.

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