नई दिल्ली: जमीयत उलेमा ऐ हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और राष्ट्रीय स्वंयम सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बीच हुई मुलाक़ात का देशभर में जमकर विरोध हो रहा है,और लोग इसके अलग अलग मतलब निकाल रहे है।
सहारनपुर के वरिष्ठ चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले काँग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व विधायक इमरान मसूद ने कहा कि मौलाना अरशद मदनी और मोहन भागवत की मुलाक़ात को देवबंद के गौरवशाली इतिहास को कठघरे में ला दिया है।
इमरान मसूद ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि मौलाना अरशद मदनी साहब ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत से मुलाकात करके जमीयत उलमा ए हिंद और दारुल उलूम, देवबंद के गौरवशाली इतिहास को कठघरे में ला दिया है।
इमरान मसूद ने सवाल किया कि अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि मदनी साहब आरएसएस की चौखट पर क्यों गए? अंग्रेजों के दोस्तों से हाथ मिलाने की अचानक कौन सी मजबूरी आई?

कांग्रेस नेता ने सवालो की झड़ी लगाते हुए कहा कि मुसलमानों को आरएसएस का खौफ दिखाने वाले खुद संघ मुख्यालय में घुटने टेकने चले गए, क्यों? आपने पहल की, लेकिन किस समझौते के तहत की?
दारुल उलूम देवबंद की प्रतिष्ठा के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस पर किसी राष्ट्रीय हस्ती को आमंत्रित करने के बजाए डीएम और एसएसपी से ध्वजारोहण कराना इस बात का प्रतीक है कि हमारी गौरवशाली संस्थाएं कितने जिम्मेदार हाथों में हैं।