
मध्य प्रदेश में आठ साल की बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने के मामले में भोपाल की एक अदालत ने मात्र 32 दिन की सुनवाई के बाद एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है. अभियोजन के पक्ष में 30 गवाहों अदालत में बयान दिए. कोर्ट ने दोषी को दो अलग-अलग धाराओं के अधीन फांसी की सजा सुनाई है. दोषी को बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए आजीवन करावास की भी सजा सुनाई गई है.
मध्यप्रदेश अभियोजन के जनसंपर्क अधिकारी सुधा विजय सिंह भदौरिया ने गुरुवार को बताया कि विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने आरोपी बिष्णु बामोरे को दोषी करार देते हुए हत्या आईपीसी की धारा 302 और 12 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ दुष्कर्म धारा 376 एबी मामलों में दो अलग-अलग धाराओं के तहत फांसी की सजा सुनाई है.
भदौरिया ने बताया कि दोषी को बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए आजीवन करावास की भी सजा सुनाई गई है. उन्होंने बताया कि भोपाल और सागर स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में किए गए डीएनए परीक्षण की रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के आधार पर बामोरे को दोषी ठहराया गया. इसके साथ ही अभियोजन के पक्ष में 30 गवाहों अदालत में बयान दिए.
भोपाल के कमला नगर इलाके में आठ जून को अपने घर से बाहर खरीददारी करने गई लड़की लापता हो गई थी. उसका शव अगले दिन सुबह इलाके में एक नाले के पास मिला. नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के आरोप में पुलिस ने 10 जून को बामोरे को खंडवा जिले के मोरटक्का गांव से गिरफ्तार किया था.
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