
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन के साथ इमरान खान ने सम्मेलन को संबोधित किया। गोलमेज में यूनाइटेड नेशंस अलायंस ऑफ सिविलाइजेशंस (यूएनएओसी) के उच्च प्रतिनिधि मिगुएल एंजेल मोराटिनोस ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया से घृणा भाषण को खत्म करने की जरूरत है।
इमरान खान ने कहा कि आतंकवाद से इस्लाम का रिश्ता 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद से जुड़ गया और पश्चिमी देशों के नेताओं ने बार-बार इस्लामिक आतंकवाद और इस्लामिक कट्टरता जैसे शब्दों का उपयोग किया।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, उन्होंने कहा कि जब जापानी आत्मघाती हमलावरों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी जहाजों पर हमले किए, तो किसी ने उनके धर्म पर आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा, ‘क्योंकि धर्म का इससे कोई लेना-देना नहीं है। लगभग सभी धर्म राजनीति से जुड़े हैं।
यह राजनीतिक अन्याय है जो लोगों में निराशा पैदा करता है।’ राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि घृणास्पद भाषण मानवता के सबसे बड़े अपराधों के तौर पर जन्मा है और घृणास्पद भाषण के मामले में मुस्लिम दुनियाभर में सबसे संवेदनशील समुदाय है। उन्होंने भारत का उल्लेख किया, जहां ‘बीफ खाने पर मुस्लिमों की हत्या कर दी गई।’
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