
भारतीय राजनीति के इतिहास में सोमवार का दिन विशेष रूप से दर्ज किया जाएगा. 23 मई को प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में चुनकर सत्ता में आए नरेंद्र मोदी ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को खत्म कर दिया. केंद्र सरकार के इस कदम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ हो रही है. कई लोग तो पीएम मोदी के फैसले की तारीफ करते हुए इसे 70 साल पुरानी भूल सुधार बता रहे हैं. इतना ही सरकार के फैसले को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस में भी दो तरह की आवाजें सुनाई देने लगी हैं.
इस सब के बीच बीजेपी सांसद गुमन सिंह दामोर ने पीएम मोदी की तारीफ में एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्हें युगपुरुष बताते हुए भारत रत्म दिए जाने की मांग कर डाली. सांसद गुमन सिंह दामोर ने सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कहा, ”मोदी जी युगपुरुष हैं. बहुत से देशों ने उन्हें सम्मान दिया है. आज उन्होंने फैसला लेते हुए उन्होंने करोड़ों भारतीयों को खुश कर दिया. मैं मांग करता हूं कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.” मध्य प्रदेश के रतलाम लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.
राज्यसभा के बाद अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने वाला संकल्प पत्र आज लोकसभा में पेश हो सकता है. लोकसभा से पास होते ही कश्मीर भी भारत के दूसरे राज्यों की तरह बन जाएगा. नंबर के आधार पर लगता नहीं कि लोकसभा में सरकार को कोई परेशानी होने वाली है. एनडीए अपने दम पर बिल को आसानी से पास करा सकती है. लोकसभा से पारित होने के बाद औपचारिक तौर पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म हो जाएगी और जम्मू कश्मीर असल मायने में भारत का अभिन्न अंग बन जाएगा. लोकसभा से पारित होने के बाद औपचारिक तौर पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म हो जाएगी.
सरकार के फैसले के बाद अब क्या होगा?
पहले जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था लेकिन अब ये खत्म हो गया है. यानी देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पा सकता है. जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थाई नागरिकों को था, अब दूसरे राज्य के लोग यहां वोट कर सकेंगे. चुनाव में उम्मीदवार भी बन सकते हैं. देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पा सकता है. स्कॉलरशिप हासिल कर सकता है. दूसरे राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में बिजनेस कर सकेंगे. राज्य की विधानसभा का कार्यकाल अब पांच साल का होगा, जो पहले छह साल का था. लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी, लेफ्टिनेंट गवर्नर होगा.
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