
भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने नई आर्थिक नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि यदि नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो भारत के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है।
उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही 2019-20 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई है। यह पिछले छह सालों में सबसे कम है।
Get ready to say good bye to ₹ 5 trillion if no new economic policy is forthcoming. Neither boldness alone or knowledge alone can save the economy from a crash. It needs both. Today we have neither
— Subramanian Swamy (@Swamy39) August 31, 2019
अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, ‘यदि कोई नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को गुडबाय कहने के लिए तैयार हो जाइये।
अकेले केवल साहस या केवल ज्ञान चरमराती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकते हैं। इसके लिए दोनों की जरूरत है। आज हमारे पास दोनों में से कुछ नहीं है।’
संसद में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था तो उन्होंने देश के सामने पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा था। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यदि हम सब मिलकर काम करेंगे तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी लक्ष्य पर स्वामी ने ट्वीट करके इसे गुडबाय कहने को तैयार रहने के लिए कहा है।
अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘लगातार कई तिमाहियों से मंदी की स्थिति बनी हुई है। लेकिन सरकार इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। हमें लगता है कि शायद भाजपा सरकार को समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए? ऐसे में जिम्मेदार विपक्ष के नाते हमारे कुछ सुझाव हैं।’
सरकार लगातार कई कदम उठा रही है जिसमें आर्थिक मंदी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर बैंकों का विलय करना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार निवेश पर ध्यान नहीं देती है तो अर्थव्यस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। पिछले कुछ महीनों से कमजोर मांग और निवेश की कमी के कारण मुख्य उद्योगों की वृद्धि में मंदी दिखाई दे रही है।
मंदी का असर सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों पर पड़ा है उसमें ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और रीयल एस्टेट शामिल है। हालांकि, मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है।
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