
अयोध्या मामले पर फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पुनर्विचार याचिका दायर की है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने यह याचिका लगाई।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, 217 पन्नों की इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मुस्लिम संगठनों का पक्ष दोबारा सुने जाने की मांग की गई है।
पक्षकार एम. सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि मंदिर बनाने को लेकर ट्रस्ट का निर्माण न करे।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1934, 1949 और 1992 में मुस्लिम समुदाय के साथ हुई ना-इंसाफी को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन उसे नजरअंदाज भी कर दिया।
इस मामले में पूर्ण न्याय तभी होगा जब मस्जिद का पुनर्निर्माण होगा। विवादित ढांचा हमेशा ही मस्जिद था और उस पर मुसलमानों का एकाधिकार रहा है।
याचिका दाखिल किए जाने को लेकर मुस्लिम पक्षों की राय बंटी हुई है। सुन्नी वक्फ बोर्ड याचिका दाखिल करने से इंकार कर चुका है। बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया था। बैठक में 8 में से 7 सदस्य शामिल हुए थे। इनमें से 6 सदस्य याचिका दाखिल नहीं किए जाने के पक्ष में थे।
इसका मतलब है कि बोर्ड इस मामले को दोबारा सुप्रीम कोर्ट नहीं ले जाएगा। इसके साथ ही जमीन के मामले पर बोर्ड का कहना है कि जब सरकार की ओर से इस पर कोई प्रस्ताव आएगा, तो उसके बाद इस पर फैसला लेंगे।
उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) भी याचिका दाखिल करने को तैयार है। बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा कि इस मामले में उसकी ओर से भी 9 दिसंबर तक पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। अभी इसकी तैयारी की जा रही है।
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