
लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) की वह याचिका लौटा दी, जिसमें उन्होंने राजद्रोह मामले में सुनाई गई सजा को चुनौती दी थी. अदालत ने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान पूर्ण पीठ उपलब्ध न हो पाने का हवाला देते हुए याचिका लौटाई है. डॉन न्यूज के मुताबिक, ख्वाजा अहमद तारिक रहीम और अजहर सिद्दीकी के एक कानूनी पैनल ने शुक्रवार को अर्जी दायर की थी, जिसमें राजद्रोह की शिकायत से शुरू होने वाले सभी कार्यों, विशेष ट्रायल कोर्ट की स्थापना और इसकी कार्यवाही को चुनौती दी गई थी.
एलएचसी के मुख्य न्यायाधीश सरदार मुहम्मद शमीम खान द्वारा हाल ही में गठित तीन न्यायाधीशों वाली पूर्ण पीठ 9 जनवरी, 2020 को मुख्य याचिका को देखने वाली है. एडवोकेट सिद्दीकी ने डॉन न्यूज को बताया कि एलएचसी रजिस्ट्रार के कार्यालय ने शुक्रवार को याचिका वापस कर दी, क्योंकि शीतकालीन अवकाश के दौरान पूर्ण पीठ उपलब्ध नहीं थी.
उन्होंने कहा कि याचिका जनवरी के पहले सप्ताह में फिर से दाखिल की जाएगी. विशेष अदालत ने 17 दिसंबर को अपने फैसले की घोषणा की थी और मुशर्रफ को 2-1 के बहुमत के साथ मौत की सजा सुनाई थी.
बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति व सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ के पार्थिव शरीर को तीन दिनों तक फांसी पर लटकाने के विशेष अदालत के विवादास्पद फैसले के बाद पाकिस्तानी सेना व न्यायपालिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार देश की स्थिरता सुनिश्चित करेगी और इसे बेपटरी नहीं होने देगी. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय में अपने कानूनी सहयोगी डॉ. बाबर अवान के साथ एक बैठक के दौरान इमरान खान ने कहा कि राष्ट्र के संस्थानों को मजबूत करना सरकार का कर्तव्य है.
अदालत के इस फैसले को सेना के साथ ही सरकार ने भी गलत ठहराया है और वह मुशर्रफ के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं. उन्होंने पेशावर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है, जिन्होंने इस मामले में फैसला सुनाया था. सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी फैसला किया है.
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