दिल्ली हिंसा: राहत इंदौरी बोले- आग का क्या है पल दो पल में लगती है, बुझाते बुझाते एक ज़माना लगता है

देश की राजधानी दिल्ली में CAA के पक्ष और विपक्ष में लोग आमने सामने आ गए हैं। कल तक जो प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा था उसमें कुछ नेताओं ने लोगों को भड़का दिया है जिसका नतीजा आगजनी और पत्थरबाज़ी के रूप में हमारे सामने आ रहा है।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बीते दो महीने से देश के अलग अलग इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर लखनऊ के घंटाघर में भी महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं।

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हाल ही में कपिल मिश्रा और वारिस पठान जैसे नेताओं के भड़काऊ बयान के बाद दिल्ली की स्थिति खराब हो गई है। दिल्ली के शाहदरा, चांदबाग, वज़ीराबाद में हिंसक संघर्ष हुआ है जिसमें अब तक 1 हेड कांस्टेबल समेत 6 लोगों के मारे जाने की खबर है।

देश के इन हालात को देखते हुए शायर राहत इंदौरी ने मशहूर शायर कैफ भोपाली को याद करते हुए उनका एक शेर ट्वीट किया है- ”आग का क्या है पल दो पल में लगती है, बुझते बुझते एक ज़माना लगता है।”

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