
जर्मनी ने सीरिया पर हमला करने के चलते तुर्की को हथियार निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन 2019 में अगस्त तक जर्मनी ने नाटो के साथी तुर्की को पिछले 14 साल में सबसे ज्यादा हथियार बेचे हैं.
Germany's weapons sales to Turkey have reached their highest level in 14 years.https://t.co/Fz1SQS65kn
— DW News (@dwnews) October 17, 2019
सीरिया पर तुर्की के हमले के बाद जर्मनी ने तुर्की को हथियारों का निर्यात रोक दिया है। जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने कहा कि सीरिया पर तुर्की के हमले के बाद जर्मनी तुर्की को किए जाने वाले हथियार निर्यात को रोक रहा है जिससे तुर्की सीरिया में इन हथियारों का इस्तेमाल ना कर सके।
We‘re at the point where people thank Angela Merkel for making a call to Erdogan. A call. Where do you think Turkey gets its weapons from? https://t.co/jVebtnuxt6
— Lexi Alexander (@Lexialex) October 13, 2019
मास का कहना है कि 2016 से ही जर्मन सरकार ने तुर्की को होने वाले निर्यात को मुश्किल कर दिया था। आफ्रिन के इलाके में तुर्की की सेना के हमले के बाद हथियार निर्यात को और मुश्किल कर दिया गया था।
जर्मनी ने 2018 में 24.3 करोड़ यूरो यानी लगभग 1922 करोड़ रुपये के हथियारों का निर्यात तुर्की को किया। तुर्की जर्मनी का तीसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है।
जर्मनी के बाद यूरोपीय संघ के और देशों ने भी तुर्की को हथियार निर्यात करने पर रोक लगा दी। इसके अलावा यूरोपीय संघ के देशों के बीच तुर्की पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग भी होने लगी है।
इसके साथ ही एक असाधारण परिस्थिति भी इन देशों के सामने आ गई है। तुर्की यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है लेकिन नाटो का सदस्य है. नाटो के समझौते के मुताबिक अगर नाटो का कोई सदस्य देश किसी युद्ध में शामिल होता है तो दूसरे सदस्य देशों को उसका साथ देना होगा।
लेकिन यहां कोई भी देश तुर्की का साथ नहीं दे रहा है। जर्मनी के अलावा फ्रांस, स्वीडन, फिनलैंड और नीदरलैंड्स ने भी अपने हथियारों का निर्यात रोक दिया है।
स्वीडन ने यूरोपीय संघ में तुर्की पर प्रतिबंध लगाने की बात की है। हालांकि जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास का कहना है कि यूरोपीय संघ को फिलहाल तुर्की के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकलेगा तो दूसरे कदम उठाए जाएंगे। जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने फोन कर तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोवान से बात की। उन्होंने सीरिया में हमलों को तुरंत प्रभाव से रोकने की बात की।
फिलहाल हथियारों का निर्यात रोके जाने से पहले आए आंकड़े बताते हैं कि जर्मनी ने 2019 में अब तक पिछले 14 साल की तुलना में सबसे ज्यादा हथियार तुर्की को निर्यात किए।
ये आंकड़े अगस्त 2019 तक के थे। इन आठ महीनों में ही जर्मनी ने पिछले 14 सालों में किसी भी साल से ज्यादा हथियार निर्यात किए।
2019 में अगस्त तक जर्मनी लगभग 1977 करोड़ के हथियार तुर्की को निर्यात कर चुका है। पिछले साल जर्मनी ने तुर्की को लगभग 1900 करोड़ रुपये के हथियार निर्यात किए थे। इनमें अधिकतर हथियार नौसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले थे।
इनमें तुर्की और जर्मनी की साझेदारी में विकसित की जा रहीं छह पनडुब्बियां भी शामिल हैं। इन पनडुब्बियों को बनाने का करार 2009 में हुआ था। इसके साथ ही 2019 में तुर्की को हथियार निर्यात करने के लिए जारी हुए परमिटों में भी बढ़ोत्तरी हुई।
तुर्की और सीरिया के कुर्दों के बीच चल रही लड़ाई का असर जर्मनी में भी देखने को मिला। जर्मनी में तुर्की के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कुर्दों और तुर्कों के बीच झड़पें हुईं।
इन झड़पों में नौ लोग और पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। ये लोग अलग-अलग शहरों में हुए प्रदर्शनों में घायल हुए। पुलिस के मुताबिक लुइडेनशाइड शहर में एक 50 वर्षीय तुर्क को कुर्दों के प्रदर्शन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में चाकू मार दिया गया।
साभार- डी डब्ल्यू हिन्दी
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