
नेशनल पापुलेशन रजिस्टर यानी NPR के अपडेशन को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। साथ ही कैबिनेट ने इस प्रक्रिया के लिए 8,700 करोड़ रुपये के बजट आवंटन भी मंजूर किया है।
आपको बता दें कि एनपीआर के तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, कैबिनेट ने इसको ऐसे समय में मंजूरी दी है जब देश के कई राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है।
वहीं एनपीआर को लेकर भी पश्चिम बंगाल और केरल की सरकारें पहले ही विरोध जता चुकी हैं। वहीं दूसरी तरफ एनआरसी को लेकर भी लोगों के मन में संशय बना हुआ है।
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के तहत देश के सभी नागरिकों को अपना नाम इसमें रजिस्टर करवाना अनिवार्य होगा। हालांकि NPR, CAA और NRC तीनों ही अलग-अलग हैं। यह रजिस्टर इस बात का लेखा-जोखा होगा कि कौन व्यक्ति कहां रहता है।
आपको यहां पर ये भी बता दें कि वर्ष 2010 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बनी यूपीए सरकार ने NPR बनाने की पहल की थी। इसके बाद वर्ष 2011 में हुई जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब जबकि 2021 में दोबारा जनगणना होनी है तो एनपीआर पर भी काम मुमकिन है जल्द ही शुरू हो जाए।
जानकारी के लिए ये भी बता दें कि यदि कोई व्यक्ति बाहरी भी है और किसी एक जगह पर वो छह माह या अधिक समय से रह रहा तो उसको भी एनपीआर में रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा।
NPR का मुख्य मकसद पूरे देश के नागरिकों का एक बायोमैट्रिक डाटा तैयार कर असली लाभार्थियों की पहचान करना और उन तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से उसका संबंध, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति, शादीशुदा होने पर पति/पत्नी का नाम, लिंग, जन्म स्थान, नागरिकता, वर्तमान पता, पते पर रहने की अवधि, स्थायी पता, व्यवसाय, शैक्षणिक स्थिति। इसके अलावा पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और आधार से जुड़ी जानकारी भी मांगी जा सकती है।
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