
नई दिल्ली। यमुना फ्लड प्लेंस में बाढ़ के पानी को इकट्ठा करने की दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल की महत्वाकांक्षी परियोजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली सरकार में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री श्री सत्येंद्र जैन ने 9 अगस्त, 2019, शुक्रवार को यमुना पुश्ता स्थित सांगरपुर में इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया।
इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, यह एक अभिनव प्रयोग है। मैं शुभकामनाएं देता हूं और मैं ये चाहता हूं कि ये पायलट प्रोजेक्ट सफल हो। आने वाले समय में ये पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली मॉडल के रूप में केवल देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनाया जाए।
श्री शेखावत ने कहा, पूरे विश्व में पानी एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर भारत के मामले में देखें तो ये और भी बड़ी चुनौती है। दुनिया भर में कुल मिलाकर लगभग 75 फीसदी पानी उपलब्ध है लेकिन उसमें से पीने योग्य पानी महज 3-4 फीसदी है। अगर अंर्टाकटिका और अन्य ग्लेशियर की बर्फ को छोड़ दें तो दुनिया में केवल 1 फीसदी पानी पीने योग्य है। भारत के मामले में ये चुनौती इसलिए भी और बड़ी है क्योंकि विश्व में उपलब्ध पानी के सामने दुनिया का हर छठा आदमी भारतीय है। विश्व की 18 फीसदी से ज्यादा आबादी आज भारत की है। अगर पशुधन की भी गणना करें तो दुनिया की 20 फीसदी आबादी भारत की है। जबकि दुनिया के कुल उपलब्ध पानी के मुकाबले भारत को केवल 4 फीसदी पानी मिला है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने कहा कि पानी, जल संसाधन, नदियां और भूगर्भ जल के बारे में बात करें तो भारत दुनिया के सबसे ज्यादा अस्वच्छ पानी वाले देश के रूप में उभरा है। दुनिया में बहुत सारे देश ऐसे हैं जहां हमसे कम पानी उपलब्ध है,हमारे यहां से कम बारिश होती है लेकिन उन्होंने अपने आने वाली पीढ़ियों को पानी के मामले में सुरक्षित किया है। ऐसे सारे देशों से हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इन देशों ने मुख्य रूप से चार काम किये हैं। हमें भी उससे प्रेऱणा लेनी चाहिए। इनके तहत हमें बारिश के जल का ज्यादा से ज्यादा संरक्षण करना चाहिए। हमें पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। पानी उपयोग करने के बाद अपशिष्ट के रूप में जो निकलता है उस पानी को साफ करके दोबारा उपयोग करने की दिशा में काम करना चाहिए। हमें तकनीकी का उपयोग करते हुए पानी का अपव्यय रोकना चाहिए। अगर हम इन चार चीजों पर एक साथ काम करेंगे तो जल की दृष्टि से देश को सुरक्षित कर सकेंगे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, मैं भी एक इंजीनियर हूं और आज आधुनिक जीवन के कारण समाज में जो भी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, साइंस एवं तकनीकी के द्वारा उसको हल किया जा सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब हम सब लोग मिलकर अच्छी नीयत के साथ उस पर काम करना चालू करें।
श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज यमुना के पानी को जमीन के नीचे संचयन करने का एक बहुत बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। अपने-अपने स्तर पर किसान तो कई प्रकार के प्रयोग किया करते थे लेकिन किसी राज्य की सरकार ने इतने बड़े स्तर पर इस तरह का प्रयोग किया हो यह शायद इतिहास में पहली बार होने जा रहा है। जिस प्रकार से आज न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, कई जगहों पर जिस प्रकार से तेजी के साथ जमीन में जल स्तर घटता जा रहा है, ऐसे में अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो यह देश और समाज के लिए एक नया रास्ता दिखाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, असल में यह जलाशय से जमीन के ऊपर नहीं बल्कि जमीन के नीचे बनाया जा रहा है। पानी का संचयन जमीन के अंदर किया जाएगा न कि जमीन के ऊपर। यहां पर लगभग एक से डेढ़ मीटर गहरे गड्ढे खोदे जाएंगे। जमीन की जो ऊपरी सतह है वह खेती तथा अन्य दूसरे कारणों से ऐसी हो गई है कि पानी नीचे नहीं जा पाता है। इसलिए ऊपरी परत को हटा दिया जाएगा और लगभग एक डेढ़ मीटर गड्ढे के बाद नीचे रेत निकल आता है, जिसमें पानी बहुत तेजी से नीचे की तरफ जाएगा और पानी का संचयन किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि एक मीटर गड्ढा खोदने की जरूरत इसलिए है क्योंकि यमुना का पानी बहता हुआ है और बहता हुआ पानी नीचे की ओर कम परकोलेट करता है। लेकिन अगर वह गड्ढा खोदकर पानी को 4 से 5 घंटे के लिए रोक दिया जाए तो पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर जमीन के अंदर जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री केजरीवाल ने बताया कि चूंकि यह हमारा पहला प्रयोग है और जल संचयन से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पानी दो मीटर प्रति दिन की रफ्तार से नीचे जाता है तो कुछ का मानना है कि पानी 10 मीटर प्रतिदिन की रफ्तार से जमीन में नीचे की ओर जाता है। इसलिए सबसे पहले हम जितनी भी जमीन मिलेगी, उस पर गड्ढे बनाकर पानी के संचयन की तीव्रता को मापने का काम करेंगे। इस प्रयोग के माध्यम से हम पानी के नीचे की ओर जाने की गति को मापेंगे। इसी प्रकार से पानी के दूर तक फैली हुई जमीन में पहुंचने की गति को मापेंगे और पानी कितनी दूर तक जाएगा उसको भी मापेंगे। इस प्रयोग से हमें यह पता चलेगा कि आने वाले समय में जब हम बड़े स्तर पर जल संचयन की प्रक्रिया को शुरू करेंगे तो कितना पानी हम इस जमीन में संचयन कर सकेंगे, जो कि उसके बाद के आने वाले 10-12 महीनों तक दिल्ली में पानी की समस्या को दूर करने के काम आएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, इस पर बहुत बार शोध हो चुके हैं। कई बड़ी-बड़ी संस्थाओं ने यहां तक आईआईटी, दिल्ली में भी इस पर शोध किया था परंतु इसे कभी लागू नहीं किया गया। गंभीरता के साथ इस प्रयोग को लागू करने का काम जून, 2019 के पहले हफ्ते में शुरू हुआ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी हम इसको करने में सफल हो जाएंगे। 7 जून को कैबिनेट में इसका नोट आया और आज मात्र 2 महीने में ही हम लोग इसे पूरा करने में सफल हुए। कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद मैं शेखावत जी से मिला उनको प्रस्ताव बताया और क्योंकि वह किसान परिवार से संबंध रखते हैं तुरंत ही उनको हमारा यह प्रस्ताव समझ आ गया। उन्होंने प्रस्ताव को देखने के बाद कहा कि अगर यह सफल होता है तो यह इस देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री श्री केजरीवाल ने कहा कि इस प्रस्ताव को शुरू करने के लिए हमने ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी, अपर यमुना रिवर बोर्ड, एनजीटी की प्रिंसिपल कमेटी, सेंट्रल वाटर कमीशन एवं एनजीटी की मॉनिटरिंग कमिटी आदि से परमिशन ली। इतने सारे संस्थानों से परमिशन मिल जाना और 2 महीने के अंदर इस प्रोजेक्ट का शुरू हो जाने के काम का 90 फीसदी श्रेय शेखावत जी को जाता है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। हम सभी जानते हैं कि सरकारों में किस प्रकार से काम होता है। छोटी-छोटी परमीशन के लिए महीनों का टाइम लग जाता है। परंतु हमने जब कभी भी किसी संस्थान में परमीशन के लिए आवेदन किया, तो मैंने शेखावत जी को फोन करके उसकी जानकारी दी और 24 घंटे के भीतर हमें उसकी परमिशन मिल गई। हम मंत्री जी का तहे दिल से शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट को शुरू करने में हमारा इतना साथ दिया। आज दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के आपसी सहयोग की वजह से ही यह प्रोजेक्ट शुरू हो पा रहा है।
श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दुनिया भर में भूजल स्तर में कमी आना एक बड़ी समस्या बना हुआ है। इस प्रोजेक्ट से दिल्ली के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी पानी की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी। अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो हमने सोचा है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग को एक जन आंदोलन बनाया जाएगा। हमने सोचा है कि अगले मानसून के आने से पहले पूरी दिल्ली में एक-एक व्यक्ति को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए तैयार किया जाएगा ताकि अगली बार हर व्यक्ति अपनी बिल्डिंग में, अपने घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का स्ट्रक्चर तैयार करे और दिल्ली में जलस्तर ऊपर उठाने में सहयोग दे सके।
मीडिया से बातचीत में श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत यमुना के फ्लड प्लेंस में ऐसे कृत्रिम जलाशय बनाये जा रहे हैं जो सिर्फ 1 मीटर गहरे हैं। ये बाढ़ के पानी को इकट्ठा करेंगे। भूमि में जो पानी इकट्ठा होगा वह धीरे-धीरे रिचार्ज होकर यमुना में प्राकृतिक तरीके से वापस जाएगा। इससे न केवल नदी के प्रवाह को लंबे समय तक बनाये रखने में मदद मिलेगी बल्कि इस क्षेत्र में वाटर रिचार्ज में सहयोगी होगा। दिल्ली सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया है, इसकी सफलता भारत में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के मामले में मील का पत्थर साबित होने वाला है।
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, दुनिया भर में, देश भर में पानी की बहुत समस्या हो रही है, उसको देखते हुए हम दिल्ली में एक प्रयोग कर रहे हैं। जब बारिश के दिनों में यमुना में पानी बहुत ज्यादा आता है तो साइड में यमुना फ्लड प्लेंस में कई सारे जलाशय बनाकर वहां पानी का संचयन होगा जो कि ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करेगा। ये रिचार्ज नीचे भी होगा और साइड में भी होगा। हम पायलट प्रोजेक्ट कर रहे हैं। अगर ये सफल होता है, तो दिल्ली की पानी की जरूरतों को पूरा करने में ये एक मील का पत्थर साबित होगा। पिछले डेढ़ महीने के अंदर ये प्रोजेक्ट यहां तक पहुंच पाया है, इसका 90 फीसदी श्रेय मैं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र शेखावत जी को दे रहा हूं।
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