
उपचुनाव और चुनाव के नतीजों से बीजेपी और उसकी सहयोगी दलों निंदा उड़ी हुई है। ऐसा लगता है कि एनडीए परेशान हैं
झारखंड में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ’65 पार’ का नारा बुलंद करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कई दिग्गज नेताओं के पार्टी में शामिल होने से उत्साहित थी, लेकिन गुरुवार को दो राज्यों- खासकर हरियाणा और बिहार में हुए उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, भाजपा के नेताओं की मानें तो पार्टी ने एक रणनीति के तहत विपक्षियों का मनोबल तोड़ने के लिए विपक्षी दलों के ऐसे नेताओं को तोड़ने की योजना बनाई थी, जो अपनी पार्टी के नेतृत्व से नाराज थे। भाजपा की यह रणनीति कामयाब भी रही।
कांग्रेस और झामुमो में सेंध लगाते हुए सुखदेव भगत, मनोज यादव, कुणाल षाडंगी, ज़े पी़ पटेल और भानु प्रताप शाही जैसे विधायकों को भाजपा में शामिल भी कर लिया गया। इनके शमिल होने के बाद भाजपा खेमे का उत्साह और बढ़ा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव कहते हैं, “हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार उपचुनाव के नतीजा ने एक बार फिर भाजपा के खोखले विकास के दावों की हवा निकाल दी है। अब भाजपा का बड़बोलापन समाप्त हो जाएगा।
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