“आरे फॉरेस्ट की होती रही हत्या, लेकिन पीएम भावुक नहीं हुए” – शिवसेना

“आरे फॉरेस्ट की होती रही हत्या, लेकिन पीएम भावुक नहीं हुए” – शिवसेना

मुंबई के आरे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर शिवसेना ने अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधा है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा कि पेड़ों के पास वोट करने का अधिकार नहीं होता, इसलिए उनकी हत्या का आदेश दे दिया जाना चाहिए? यह किस तरह का न्याय है? अगर विदेश के किसी जंगल में आग लगती है तो लोग इसके लिए रोते हैं, लेकिन यहां हमारी आंखों के सामने पूरे जंगल की हत्या हो रही है, ना तो प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) भावुक हुए और ना ही मुख्यमंत्री (देवेंद्र फडणवीस) को इसकी चिंता है।

सरकार को रात में पेड़ काटने की कीमत चुकानी होगी

इसके अलावा महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने कहा है कि आरे मुद्दे को जिस तरह से दबाया जा रहा है, वो और कुछ नहीं बल्कि तानाशाही है। पार्टी ने कहा कि गंगा और यमुना का शुद्धिकरण प्रधानमंत्री के एजेंडा पर है, हालांकि मुंबई में जंगल कट रहा है, वो स्वीकार्य है।  शिवसेना ने कहा है कि सरकार को रात में पेड़ काटने की कीमत चुकानी होगी। इसके साथ ही पार्टी ने कहा है कि हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पेड़ कटने के खिलाफ हैं।

शिवसेना ने लिखा कि पेड़ मूक हैं लेकिन पेड़ों के लिए प्रदर्शन करने वाले सैकड़ों लोग मूक नहीं हैं। लोगों का आक्रोश न्यायालय तक पहुंचा इसके बावजूद एक प्रकार की शून्यता देखने को मिली। संपादकीय में लिखा कि पेड़ों को वोट देने का अधिकार नहीं है तो क्या उनको काट देना चाहिए।

कविता के माध्यम से साधा निशाना

शिवसेना ने संपाकीय में लिखा, ‘मेरा घर मेरे लिए ही दुखदायी हो गया’, यह एक कविता की पंक्ति है। इसमें बताया गया कि दरिद्रता के कारण अपना घर दुखदायी हो जाता है। वैसे ही मुंबई में आरे का जंगल दुखदायी हो गया है क्योंकि वो विकास के आड़े आ रहा है। इसमें बताया कि घर दुखदायी होने पर उसे कोई जलाता नहीं, लेकिन आरे के जंगल को नष्ट किया जा रहा है।

न्यायालय के आदेश पर उठाए सवाल

सामना में संपादकीय में लिखा, ‘न्यायालय ने पेड़ों को काटने का आदेश दिया। वहीं, कोर्ट के आदेश की स्याही सूखने से पहले ही सरकार ने पेड़ों का कत्ल शुरू कर दिया। रात के अंधेरे में आरे को श्मशान कर दिया। जैसे न्यायालय का क्या निर्णय आएगा, ये इन्हें पहले से ही पता हो। गोरेगांव के आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड के लिए 2647 पेड़ काटे जाने हैं।

न्यायालय का आदेश जिस शाम आया, उसी रात में 1,500 पेड़ काट दिए गए। लोगों ने इसका विरोध किया तो धारा-144 लागू कर विरोधियों को जेल में डाल दिया गया। यह कानून का राज है क्या? 100 अपराधी छूटें तब भी चलेगा, लेकिन एक भी निरपराध को सजा नहीं होनी चाहिए, ऐसा हमारे कानून का सिद्धांत है लेकिन पेड़ों को बोलना नहीं आता है। न्यायालय के दरवाजे पर खड़ा रहना नहीं आता है।

हर संभावित तरीके से आरे फॉरेस्ट के हत्यारों से निपटेंगे

बता दें कि हाल ही में शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने आरे मामले पर कहा था कि आने वाली सरकार हमारी सरकार होगी और जैसे ही हमारी सरकार फिर से सत्ता में आती है, हम हर संभावित तरीके से आरे फॉरेस्ट के हत्यारों से निपटेंगे।

आरे कॉलोनी को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 अक्टूबर के फैसले के बाद रात में पेड़ कटने पर शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा था, ‘मुंबई मेट्रो 3, एक प्रोजेक्ट जिसे गर्व के साथ पूरा किया जाना चाहिए था, उसे शर्म, कपट और भारी पुलिस बल के साथ रात में आगे बढ़ाना पड़ रहा है।’

क्या है पूरा मामला

दरअसल, मुंबई के आरे क्षेत्र में एक मेट्रो कार शेड बनना है। इस मेट्रो कार शेड को बनाने में लगभग 2700 पेड़ काटे जाने है। इसी बात का पर्यावरणविद और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

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