नई दिल्ली: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अचानक देवबन्द पहुँचकर जमीयत उलेमा ऐ हिन्द की प्रमुख मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात करना चर्चा का विषय बना हुआ है,जिसके कई मतलब निकाले जारहे हैं।
देवबन्द पहुँचने पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या होने से बच गई। क्योंकि जिस तरीके से पद का दुरुपयोग कर चोर दरवाजे से सरकार बनाई गई थी वो संवैधानिक लोकतंत्र के उपर जबरदस्त चोट थी।

बुधवार की देर रात्रि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। जहां करीब आधा घंटे तक बंद कमरे में दोनों के बीच बातचीत हुई।
इसके उपरांत पत्रकारों से बात करते हुए हरीश रावत ने कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरह रातों रात पद का दुरुपयोग कर सरकार बनाई गई थी वो संवैधानिक लोकतंत्र के उपर जबरदस्त चोट थी। लोकतंत्र की हत्या होने से बचाने के लिए उद्धव ठाकरे और शरद पवार बधाई के पात्र हैं।
इसके साथ ही रावत ने मौलाना मदनी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात को मजबूत और सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि उसका परिणाम यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मसले पर जो फैसला दिया उसका पूरा देश ने एक स्वर में सम्मान किया। इतना ही नहीं इससे देश के अंदर यह संदेश भी गया कि हिंदू मुसलमानों के बीच आपस में राब्ता ठीक रहेगा तो बड़ी से बड़ी मुश्किल पार हो सकती है।
रावत ने अयोध्या मसले पर जमीयत द्वारा रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का निर्णय लेने पर कहा कि यह कोर्ट और संविधान पर यकीन का प्रतीक है इसको अनावश्यक तूल नहीं देना चाहिए। गांधी परिवार की सुरक्षा कम करने के मुद्दे पर हरीश रावत ने कहा कि यह ऐतिहासिक भूल है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
इसी प्रकार की कार्रवाई पहले भी हुई थी जिसकी वजह से हमें राजीव गांधी को खोना पड़ा था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि इस देश के अंदर हमारे संविधान के माध्यम से ऐसे लोग चुन कर आ रहे हैं जो राष्ट्रपिता के हत्यारों का सम्मान करते हैं और उनका मंदिर बनाने की बात करते हैं।
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