पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण महाराष्ट्र में कांग्रेस का ऐसा चेहरा माने जाते हैं जो हर मुश्किल में पार्टी के साथ खड़े रहे हैं. मोदी लहर होने के बावजूद 2014 में नांदेड सीट से उन्होंने कांग्रेस को जीत भी दिलाई थी. आइए जानें- कौन हैं अशोक चव्हाण जिन्हें महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद मिला है.
अशोक चव्हाण मूलतः औरंगाबाद जिले की पैठण तहसील के रहने वाले हैं. लेकिन उनके पूर्वज नांदेड़ में आकर बसे और तब से वो नांदेडकर कहलाने लगे. उन्हें राजनीतिक विरासत पिता शंकरराव चव्हाण से मिली जो दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं.
शंकरराव चव्हाण ने कांग्रेस में रहकर केंद्र और राज्य की सत्ता संभाली. कहा जाता है शंकरराव चव्हाण की ही बदौलत मराठवाड़ा में कांग्रेस मजबूत हुई और सत्ता विरोधी लहर होने के बावजूद कांग्रेस को कोई यहां से हिला नहीं पाया.
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि शंकरराव चव्हाण की राजनीतिक विरासत का फायदा उनके दो शिष्यों को मिला. वो हैं विलास राव देशमुख और खुद उनके बेटे अशोक चव्हाण. मराठवाड़ा से आने वाले ये दोनों नेता ऐसे रहे हैं जो महाराष्ट्र में मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री पद पर रहे.
लगे थे घोटाले के आरोप
अशोक चव्हाण 8 दिसंबर 2008 से 9 नवंबर 2010 तक डेढ़ साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. उनका नाम आदर्श इमारत घोटाले में आने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

उस वक्त राजनीतिक जानकारों का कहना था कि मुख्यमंत्री पद जाने के बाद अशोक चव्हाण का राजनीतिक वनवास शुरू हो गया, लेकिन उन्होंने वापसी की और 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की. यहां तक कि वो महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बनाए गए.
नांदेड़ महाराष्ट्र के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का गृह क्षेत्र है. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 2 सीट जीतने में कामयाब रही थी. जिसमें अशोक चव्हाण नांदेड़ सीट से निर्वाचित हुए थे.

नांदेड़ लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. इस सीट पर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं, इनमें से 15 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की. पार्टी की वहां पर मजबूत स्थिति कायम रखने के पीछे अशोक चव्हाण की भूमिका को भी सराहा जाता है.
इस सीट से अभी भी कांग्रेस के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सांसद हैं. 2014 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के दिगंबर बापूजी पाटिल को हराया था.
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि शिवसेना को 18 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं कांग्रेस को मात्र 2 सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली
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