नई दिल्ली: ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तिहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदउद्दीन ओवैसी ने बिहार के किशनगंज रुइधासा मैदान में ‘संविधान बचाओ’ आंदोलन को संबोधित करने पहुंचे थे,जहां ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिक पंजी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि आखिर आपके मन में मुसलमानों के प्रति इतनी नफरत क्यों है? ओवैसी ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री इन कदमों से देश को बांटना चाहते हैं तथा संविधान को नष्ट कर रहे हैं।
इसी रैली में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर जनता को गुमराह कर रहे हैं। मोदी एक बार फिर सीएए, एनआरसी और एनपीआर जैसे कदमों के जरिए देश को बांटना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा कि एनपीआर और एनआरसी में कोई अंतर नहीं है। अगर हम आज चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना होगा।

Aimim अध्यक्ष ने कहा कि मुसलमानों ने भारत में रहने का रास्ता अपनाकर देशभक्त होने का प्रमाण दिया था लेकिन प्रधानमंत्री इसी समुदाय से नागरिकता साबित करने को कह रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘आपके मन में मुसलमानों के प्रति इतनी नफरत क्यों है, नरेंद्र मोदी जी? आपको हमारी देशभक्ति पर शक क्यों है?’
उन्होंने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) पर जेडीयू के समर्थन को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी आलोचना की।ओवैसी ने कहा, ‘सुशासन बाबू, भारत के संविधान को खराब करने के लिए देश आपको कभी माफ नहीं करेगा। संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और नीतीश कुमार आंखें बंद किए बैठे हैं।’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इन कानूनों के जरिए बाबा साहेब और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सपनों को तोड़ रही है। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा, ‘यह मसला केवल मुसलमानों के लिए नहीं है, बल्कि यह सभी 130 करोड़ लोगों का मसला है। इस पर हम लोगों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसका विरोध लगातार किया जाएगा।’ ओवैसी ने मोदी पर मुसलमानों से नफरत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के मुसलमानों ने भी आजादी की लड़ाई में कुर्बानियां दी थीं।
ओवैसी ने किसी से नहीं डरने की बात करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने संविधान लागू करते समय इस बात का जिक्र किया था कि यह देश किसी एक खास मजहब के लोगों का नहीं, बल्कि सभी मजहब को मानने वालों का होगा। ओवैसी ने दावा करते हुए कहा कि असम में इस कानून के तहत बांग्ला भाषा बोलने वाले पांच लाख लोगों को डिटेंशन कैंपों में रखा गया है।
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