RSS ने कहा- ‘बाबरी मस्जिद- राम मंदिर पर फैसले का जश्न नहीं मनाई जायेगी’

RSS ने कहा- ‘बाबरी मस्जिद- राम मंदिर पर फैसले का जश्न नहीं मनाई जायेगी’

संघ ने साफ़ किकिया नमस्ते कि बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी आयेगा हम सभी उसे स्वीकार करेंगे।
साथ ही कहा कि इस पर आने वाले फैसले का कोई जश्न नहीं मनाई जायेगी।

संघ नेताओं की दिल्ली में दो दिवसीय बैठक जारी है। बैठक का आज पहला दिन है। बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भैय्याजी जोशी समेत आरएसएस के नेता मौजूद हैं।

न्यूज़ स्टेट पर छपी खबर के अनुसार, बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बैठक में मौजूद हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह और संगठन के संयुक्त महासचिव बी.एल संतोष की भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ राम मंदिर के मामले को लेकर बैठक कर रहे हैं। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने ट्वीट करते हुए हुए कहा कि हरिद्वार में प्रचारक वर्ग के साथ दो दिन की बैठक पहले से निश्चित थी।

प्रचारक वर्ग के आवश्यक कारणों से बैठक स्थगित कर दी गई है। इसके आगे उन्होंने कहा कि बैठक हरिद्वार के स्थान पर अब दिल्ली में हो रही है।

उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के वाद पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है. निर्णय जो भी आए उसे सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए.

निर्णय के पश्चात देश भर में वातावरण सौहार्द्रापूर्ण रहे, यह सबका दायित्व है, इस विषय पर भी बैठक में विचार हो रहा है

राम मंदिर पर पक्ष में फैसला आने की स्थिति में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। इसके मद्देनजर संघ ने रणनीति बनाई है। उन्होंने कहा कि फैसला आने के बाद सड़क पर उतर कर जश्न नहीं मनाएंगे। मंदिरों और घरों में पाठ करेंगे. जब अयोध्या की जमीन कानूनी रूप से मिल जाएगा तब देश भर में जश्न मनाया जाएगा।

वहीं इससे पहले आरएससस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हम अदालत के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं और हम उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आएगा।

इस अवसर पर जोशी ने कहा कि आरएसएस अदालत के फैसले के बाद उत्पन्न स्थिति के आधार पर ही अगली कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, ‘मध्यस्थता के जरिए समस्या के समाधान की कोशिश हुई थी। हम भी चाहते थे कि मध्यस्थता के जरिए कोई हल निकले।

हालांकि तय समय सीमा में कोई भी उचित हल नहीं निकल पाया। जोशी ने इस अवसर पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का भी मुद्दा उठाया।

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