दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थक और विरोधियों के बीच भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कारण 45 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसी बीच, जबकि दिल्ली में तनाव की स्थिति बरकरार है, सोशल मीडिया में कई ग़लत सूचनाएं शेयर की जा रही हैं.
एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति को ज़मीन के अंदर से एक छोटे बच्चे और महिला के शव को निकालते हुए देखा जा सकता है. मेजर मोहम्मद आरिफ़ नाम के एक ट्विटर यूज़र ने ये वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया कि भारत में मुस्लिमों को ज़िंदा दफ़नाया जा रहा है. ये आर्टिकल लिखते वक़्त तक इसे क़रीब 85,800 बार देखा जा चुका है. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)
Muslims are being buried alive in India. 😭😭😭 pic.twitter.com/KghAvgCtP5
— Major Muhammad Arif TI(M) (R) (@marifthahim) February 29, 2020
ये वीडियो इसी दावे के साथ कई यूज़र्स फ़ेसबुक और ट्विटर पर शेयर कर रहे है.

इस वीडियो को आरएसएस पर निशाना साधते हुए यूट्यूब पर भी अपलोड किया गया है.
फ़ैक्ट-चेक
ऑल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो के की-फ्रेम को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया. जिससे हमें पश्चिम बंगाल के अख़बार ‘एई समय’ का 31 जनवरी, 2020 का एक आर्टिकल मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के हलुगुज गांव की है. आगे बताया गया है कि किसी पारिवारिक झगड़े के कारण अकबर अली ने अपनी पत्नी और डेढ़ महीने की बेटी की हत्या कर दी थी. बाद में अकबर ने उन्हें घर के पास वाली ज़मीन में दफ़ना दिया था. गांववालों को संदेह हुआ और वो सब अकबर के घर पहुंचे. उन्होंने अकबर के घर को आग के हवाले कर दिया. हालांकि, अकबर वहा से फ़रार हो गया था.

इसके अलावा, हमें न्यूज़ 18 बांग्ला की एक वीडियो रिपोर्ट भी मिली, जिसमें इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से बताया गया है.
इससे ये साफ़ हो जाता है कि वीडियो में दिख रही महिला और बच्ची को उसी के पति ने हत्या कर दफ़ना दिया था. इस तरह, सोशल मीडिया पर किया गया दावा कि ये वीडियो हिन्दुओं और आरएसएस के लोगों द्वारा मुसलमानों को ज़िन्दा दफ़नाने का है, ग़लत साबित हुआ.
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