नई दिल्ली: जमीयत उलमा-ए-हिन्द के जनरल सेक्रेट्री मौलाना महमूद ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। मौलाना महमूद मदनी ने स्विट्जरलैंड में यूरोपीय सांसदों और भारत के इसलामिक विद्ववानों की एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की मुखालिफत की है। इस प्रेस कांफ्रेंस में मौलाना मदनी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय बनाए जाने पर भारत सरकार का समर्थन किया है।
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय बनाए जाने से जम्मू,कश्मीर और लद्दाख में समृद्धी आएगी। उन्होंने इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने पर पाकिस्तान पर नाराजगी जताई और कहा कि ये भारत का “आंतरिक मामला” है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव ने इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कोशिशों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने नागरिकों के विकास के लिये काम करे।
महमूद मदनी ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम कश्मीर के के मामले पर पाकिस्तान और अन्य देशों द्वारा किसी भी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे, हम भारत की अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते।”
मीडिया से बात करते हुए मौलाना मदनी ने कहा, “पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर पूरे दक्षिण एशिया में तनाव फैला रहा है। अब वह भारतीय मुसलमानों के नाम पर अपने एजेंडे (जम्मू एंड कश्मीर पर भारत के कदम पर) को दुनिया भर में मुसलमानों का मामला बनाने की कोशिश कर रहा है।” इस एजेंडे का मुकाबला करने में सक्षम हैं।”
राज्यसभा के सांसद रहे मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इमरान खान सारी उम्मीदें खत्म चुकी हैं और अब वे उल्टी सीधी बयानबाजी कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने इमरान खान द्वारा भारत के खिलाफ युद्ध की धमकी दिए जाने पर कहा, “हमें उनके बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।”
जेनेवा में हुई इस प्रेस कांफ्रेंस पर दरगाह अजमेर शरीफ के संरक्षक सैयद सलमान चिश्ती ने भी जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के ‘दुष्प्रचार’ को खारिज करते हुए इसे “विफल प्रयास” कहा। समान चिश्ती ने कहा कि जो लोग सच्चाई जानते हैं, वे उनके प्रचार पर ध्यान नहीं देंगे।
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर लद्दाख को विशेष दर्जा दिये जाने वाली धारा 370 को निष्क्रिय कर दिया था। उसके बाद से कश्मीर में अभी तक कर्फ्यू लगा हुआ है। कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगे 50 दिन हो गए हैं।
कश्मीर से धारा 370 को निष्क्रिय बनाए जाने के बाद दो आईएएस अधिकारी भी इस्तीफा देकर सरकार के इस फैसले का विरोध जता चुके हैं। जानकारी के लिये बता दें कि कश्मीर से धारा 370 हटाया जाना भारतीय जनता पार्टी का बहुत पुराना मुद्दा रहा है। भाजपा अपने घोषणा पत्र में इस मुद्दे को उठाती रही थी, जिसे इस बार दोबारा केन्द्र की सत्ता में आने के बाद अमली जामा पहनाया गया है।
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