दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेवल कंपनी ‘थॉमस कुक’ बंद होने से संकट में 22 हजार नौकरियां !

दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेवल कंपनी ‘थॉमस कुक’ बंद होने से संकट में 22 हजार नौकरियां !

दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेवल कंपनियों में शुमार थॉमस कुक रविवार रात को बंद हो गई। 178  साल पुरानी ब्रिटिश टूर ऑपरेटर लंबे समय से फंड की कमी से जूझ रही थी। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि बंद करने के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं था। कंपनी ने सभी हॉलिडेज, फ्लाइट बुकिंग को रद्द किए जाने की घोषणा की है। कंपनी ने दुनियाभर के ग्राहकों के लिए सहायता नंबर +44 1753 330 330 भी जारी किया है।

हालांकि भारत में ऑपरेट करने वाली थॉमस कूक इंडिया पर इसका कोई असर नहीं होगा। दरअसल, थॉमस कुक इंडिया का 77 फीसदी हिस्सा 2012 में कनाडा के ग्रुप फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग ने खरीद लिया था। तब से थॉमस कुक यूके का थॉमस कुक इंडिया में कोई हिस्सा नहीं है। थॉमस कुक इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है।

संकट में 22 हजार नौकरियां

कंपनी के अचानक बंद होने से छुट्टियां मनाने घर से निकले करीब 1.50 लाख लोग जहां-तहां फंस गए हैं। दुनियाभर में इसके 22 हजार कर्मचारियों की नौकरी भी संकट में आ गई है। इनमें से 9000 कर्मचारी ब्रिटेन में हैं।

चीफ एक्जिक्यूटिव ने मांगी माफी 

कंपनी के बंद होने से ना सिर्फ कर्मचारी बल्कि ग्राहक, सप्लायर और कंपनी के पार्टनर भी प्रभावित होंगे। इसलिए थॉमस कुक के चीफ एक्जिक्यूटिव पीटर फैंकहॉजर ने ग्राहकों, सप्लायर्स, कर्मचारी और पार्टनर्स से माफी मांगी।कंपनी ने शुक्रवार को कहा था कि कारोबार जारी रखने के लिए उसे 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की जरूरत है। इससे पहले पिछले महीने कंपनी ने 90 करोड़ पाउंड जुटाए थे।

सभी उड़ानें रद्द 

मामले में ब्रिटेन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) ने कहा है कि 23 सितंबर से लेकर छह अक्टूबर तक रेगुलेटर व सरकार 1.5 लाख से अधिक ब्रिटिश ग्राहकों को घर वापस लाने के लिए मिलकर काम करेंगे। सीएए ने ट्वीट कर बताया कि सभी बुकिंग्स रद्द कर दी गई हैं।

इसलिए बंद हुई कंपनी

दुनिया की सबसे पुरानी ट्रेवल कंपनी लंबे समय से फंड की कमी से जूझ रही थी और बैंकों की एक समिति ने अतिरिक्त फंड की उसकी मांग पर फैसला रोक दिया था। पिछले महीने अगस्त में थॉमस कुक ने चीन की शेयरहोल्डर फोसुन के साथ एक सौदे की शर्तों पर सहमति जताई थी। यह सौदा 1.1 अरब डॉलर का था। लेकिन यह निवेश रुक गया।

आरबीएस ने दिया था झटका

रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) ने भी कंपनी को झटका दिया था। बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा था कि कंपनी के 20 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त फंड की मांग को मंजूरी नहीं दी गई। बता दें कि आरबीएस पिछले कई वर्षों से कंपनी को मदद उपलब्ध कराता रहा है।

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