सऊदी के तेल क्षेत्रों पर ड्रोन हमले के बाद सेंसेक्स 642 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी 185 अंकों का नुकसान

सऊदी के तेल क्षेत्रों पर ड्रोन हमले के बाद सेंसेक्स 642 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी 185 अंकों का नुकसान

सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर ड्रोन हमले के बाद खाड़ी संकट गंभीर होने और ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बनने और कच्चे तेल में 1979 के बाद की सबसे बड़ी तेजी आने से शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बांबे शेयर बाजार का सेंसेक्स 642.22 अंक गिरकर 36,481.09 पर रह गया जबकि एनएसई निफ्टी 185.90 अंक की गिरावट के साथ 10,817.60 के स्तर पर रह गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 704 अंकों का गोता लगा गया।

सऊदी अरब में ड्रोन के हमले के बाद उसका उत्पादन घटकर आधा रह जाने के कारण कच्चे तेल में 1979 के खाड़ी युद्ध के बाद की सबसे ज्यादा तेजी दिखाई दी। सोमवार को ब्रेंट क्रूड अॉयल 20 फीसदी बढ़कर 71.95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि मंगलवार को इसकी कीमत थोड़ी घटकर 67.97 डॉलर रह गई।

डॉलर के मुकाबला रुपया 18 पैसे गिरा

कच्चे तेल की तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे गिरकर 71.78 के स्तर पर पहुंच गया। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि कच्चे तेल में भारी तेजी के कारण भारत जैसे विकासशील देशों की आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

निवेशकों ने लिवाली से हाथ खींचा

सऊदी अरब में तेल उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही अमेरिक-चीन के बीच ट्रेड वार और ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती की चिंताओं के चलते निवेशकों के सेंटीमेंट कमजोर रहे। मौजूदा हालात में निवेशकों की लिवाली कमजोर पड़ गई। बाजार में निवेशक कोई नया सौदा करने से बचते रहे। चीन और अमेरिका के बीद कारोबारी विवाद सुलझाने के लिए आगामी वार्ता और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक की बैठक के नतीजों का बाजार को इंतजार रहा।

इन शेयरों में रही ज्यादा गिरावट

बाजार में आइटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। हीरो मोटोकॉर्प का शेयर 6.20 फीसदी गिरकर 2568.95 रुपये पर रह गया। टाटा मोटर्स में भी 6.6 फीसदी की गिरावट रही। एक्सिस बैंक में 4.54 फीसदी और टाटा स्टील में 4.47 फीसदी का नुकसान दर्ज किया गया। हालांकि गेल, टाइटन, एचयूएल और एशियन पेंट्स में 1.70 फीसदी की तेजी रही। आइटी क्षेत्र में टेक महिंद्रा में सबसे ज्यादा 1.88 फीसदी की गिरावट के साथ 705.95 पर रह गया।

एशियाई बाजारों की नजर अमेरिका-चीन वार्ता पर

एशियाई बाजार में कमोबेश सुस्ती का माहौल दिखाई दिया। बाजारों को खासतौर पर फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों और अमेरिका-चीन की व्यापार वार्ता के रुख का इंतजार था। संभावना है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दर में कटौती की घोषणा कर सकता है। जापान में बाजार सूचकांक 0.6 फीसदी गिर गया जबकि चीन में 0.85 फीसदी की गिरावट रही।

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