सऊदी अरब की सुरक्षा अमेरिका के हाथों में होने के बावज़ूद हो रहे हैं लगातार हमले!

सऊदी अरब की सुरक्षा अमेरिका के हाथों में होने के बावज़ूद हो रहे हैं लगातार हमले!

व्हाइट हाउस ने सऊदी अरब की ऑयल फ़ील्ड्स पर हुए ड्रोन हमले के बाद यह एलान किया था कि, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफ़ोन करके कहा है कि अमरीका, सऊदी अरब की रक्षा के लिए तैयार है।

अमरीकी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी आराम्को पर यमनी सेना के ड्रोन हमले की ओर संकेत करते हुए यह भी कहा था कि यह हमला अमरीका और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने जिस तरह सऊदी अरब के युवराज बिन सलमान से उनके देश की रक्षा की बात कही है उससे कई प्रश्न खड़े होते हैं। सबसे पहला सवाल यही है कि क्या ट्रम्प के वादे से पहले अमेरिका ने सऊदी अरब की रक्षा में किसी भी तरह की कोई ढिलाई की है?

यमन की घेराबंदी, भूख-प्यास से दम तोड़ते यमनी, आम यमनी नागरिकों पर हर दिन बरसते बम, यमन के मूलभूत ढांचे की तबाही और सऊदी अरब के पास मौजूद अत्याधुनिक हथियार और युद्धक विमान यह सब वह चीज़ें हैं जिसमें पूरी तरह सऊदी अरब को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।

इन सबके बाजूद जिस रक्षा का वादा ट्रम्प सऊदी अरब से कर रहे हैं यह बात किसी को समझ में नहीं आ रही है कि आख़िर वह कौन सी मदद और रक्षा है जिसके लिए ट्रम्प ने मोहम्मद बिन सलमान से वादा किया है।

इस बीच दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प ऐसी स्थिति में सऊदी अरब की मदद का वादा कर रहे हैं कि जब अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञ और स्वयं अमेरिकी अधिकारियों को यह नहीं पता है कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हमले ड्रोन से हुए हैं या मिसाइल से या फिर दोनों से और यह सऊदी अरब की उस रक्षा प्रणाली की पोल खोलता है जो उसने अमेरिका बहादुर से ख़रीदा है।

ब्लूमबर्ग वेबसाइट के अनुसार, आरामको की बक़ीक़ रिफ़ाइनरी जो एक वर्ग मील से अधिक क्षेत्रफल में फैली हुई है, जिसपर मामूली हथियारों से हमला नहीं किया जा सकता, बल्कि उसपर हमला आधुनिक हथियारों से ही किया जा सकता है तभी उसे इस हद तक नुक़सान पहुंचेगा कि उसे बंद करना पड़ जाए, इसलिए अमेरिकी विशेषज्ञ यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उसपर ड्रोन से हमला हुआ है यह मिसाइल से या हर दो से। स्वयं अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी यही कह रहे हैं कि उनके पास ऐसे कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित कर सकें कि यह हमला यमन से हुआ है।

साभार- पार्स टुडे डॉट कॉम

Syndicated Feed from Siasat hindi – hindi.siasat.com Original Link- Source

اپنی رائے یہاں لکھیں

Discover more from ورق تازہ

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading