नई दिल्ली: न्यूयार्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्मेलन में दुनियाभर के अलग अलग देशो के नेताओं ने भाग लिया,जिनमें मलेशिया,पाकिस्तान,तुर्की,ब्रिटेन सहित कई अन्य देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मौजूद रहे।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान के साथ इमरान खान ने सम्मेलन को संबोधित किया। गोलमेज में यूनाइटेड नेशंस अलायंस ऑफ सिविलाइजेशंस (यूएनएओसी) के उच्च प्रतिनिधि मिगुएल एंजेल मोराटिनोस ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया से घृणा भाषण को खत्म करने की जरूरत है।

एर्दोगान ने सम्बोधित करते हुए कहा कि जब जापानी आत्मघाती हमलावरों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी जहाजों पर हमले किए, तो किसी ने उनके धर्म पर आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा, ‘क्योंकि धर्म का इससे कोई लेना-देना नहीं है। लगभग सभी धर्म राजनीति से जुड़े हैं। यह राजनीतिक अन्याय है जो लोगों में निराशा पैदा करता है।
राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि घृणास्पद भाषण मानवता के सबसे बड़े अपराधों के तौर पर जन्मा है और घृणास्पद भाषण के मामले में मुस्लिम दुनियाभर में सबसे संवेदनशील समुदाय है। उन्होंने भारत का उल्लेख किया, जहां ‘बीफ खाने पर मुस्लिमों की हत्या कर दी गई।’
24 सितंबर को संयुक्त-राष्ट्र महासभा के 74वें अधिवेशन की सामान्य बहस न्यूयॉर्क के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उद्घाटित हुई। सौ से अधिक देशों के प्रमुख, सरकार के प्रमुख और उच्च प्रतिनिधि मानव जाति के सामने मौजूद प्रमुख खतरे और चुनौतियोँ का मुकाबला करने की रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र चार्टर में मानवीय आधार पर भावना की चर्चा की और ज़ोर देते हुए कहा कि लोगों के हितों को सभी कार्यों के केंद्र में रखा जाना चाहिए। लोगों की इच्छाएं और अधिकार हमेशा हमारे काम का आधार है। समान हितों को बढ़ावा देते हुए, हमें अपनी सामान्य मानवता और मूल्यों का पालन करना चाहिए।
संयुक्त-राष्ट्र महासभा के 74वें अधिवेशन के अध्यक्ष तजनी मुहम्मद-बंदे ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कई समान चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सहयोग करने की अपील की, ताकि अनवरत विकास का लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रयास किया जा सके। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाना संयुक्त राष्ट्र कार्य का केंद्र है, विभिन्न देशों के नेताओं को रोकथाम कार्य को पहले स्थान पर रखना चाहिए।
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