नई दिल्ली: नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के चलते सरकार ने अब इस पर अपना स्पष्टीकरण दे दिया इसी कड़ी में गृहमंत्रालय ने मंगलवार को साफ किया कि एनपीआर यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के दौरान किसी तरह के कागज दिखाने की जरूरत नहीं होगी।
इसके साथ ही आधार को लेकर भी कहा गया है आधार नंबर देना वैकल्पिक होगा. सरकार ने यह जानकारी संसद में एक लिखित जवाब में दी है. कुछ राज्य सरकारों की ओर से एनपीआर ना करवाने की बात पर सरकार ने कहा कि राज्यों से बात करेगी।

सरकार की ओर से यह जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में दी. जवाब में कहा गया कि NPR के अपडेशन के दौरान किसी भी कागजात की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही सरकार ने कहा कि एनपीआर की प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा, जिससे किसी की नागरिकता पर सवाल खड़े हों।
बता दें कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर भारत के सामान्य नागरिकों का एक रजिस्टर है. इसे नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता (नागरिक पंजीकरण और पहचान पत्र) नियमावली 2003 के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. भारत के सभी नागरिकों के लिए NPR में पंजीयन अनिवार्य है।
नागरिकता कानून, एनपीआर और एनआरसी को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच मोदी सरकार लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए कदम उठाने जा रही है. सरकार एनपीआर के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कुछ बदलाव करने पर राज़ी हो गई है. सबसे बड़ा बदलाव जुड़ा है फॉर्म में माता पिता के जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी के संबंध में।
सूत्रों के मुताबिक़ सरकार इस जानकारी को वैकल्पिक बनाने जा रही है. मतलब ये हुआ कि अगर कोई इस बारे में जानकारी नहीं देना चाहते हैं तो वो ऐसा कर सकेंगे. एनडीए की शुक्रवार को हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये जानकारी दी।
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