
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी की फांसी पर रोक लगा दी है। दोषी को ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।
भास्कर डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, हाईकोर्ट के फैसले के बाद 60 दिन का वक्त गुजरने से पहले ही सेशंस कोर्ट ने डेथ वॉरंट जारी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को डेथ वॉरंट कोदोषपूर्ण बताते हुए कहा-हम यह जानना चाहते हैं कि ट्रायल कोर्ट इस तरह की गलती कैसे कर सकता है। जबकि, इस बारे में 2015 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक गाइडलाइन मौजूद है।
दोषी अनिल यादव ने14 अक्टूबर2018 को सूरत में पड़ोस में रहने वाली साढ़े तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी। इस मामले मेंसेशंस कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को उसे फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी। इसके बाद सेशंस कोर्ट ने डेथ वॉरंट जारी कर उसे 29 फरवरी को सुबह 6 बजे अहमदाबाद की साबरमती जेल में फांसी देने का आदेश दिया। दोषी ने सजा के खिलाफ 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवडे की बेंच ने कहा,“इस मामले में किसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। न्याय प्रक्रियाको इस तरह संचालित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
इसके बाद बेंच ने दोषी अनिल यादव की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस तरह डेथ वॉरंट जारी करने की वजह पूछी, तोमेहता नेकहा-कानूनकी जानकारी केअभाव में किसी जजकोऐसे फैसलेनहीं लेना चाहिए।
दोषी अनिल केकानूनी मदद मांगने पर सरकार ने अपराजिता सिंह को उसका वकील नियुक्त किया था। सिंह ने कहा-सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए उनके पक्षकार के पास अभी60 दिन का समय है।
इससे पहले डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने इस दलील को मानते हुए कहा- जब तक सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं होता, तब तक डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता।
कानून के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दोषी के पास राष्ट्रपति कोदया याचिका भेजने का विकल्प मौजूद है। अगरदया याचिका खारिज हो जाए, तो फिर सुप्रीम में अपील की जा सकती है। पूरी प्रक्रिया के बाद ही डेथ वारंट जारी किया जा सकता है।
साढ़े 3 साल की बच्ची से 14 अक्टूबर2018 को दुष्कर्म करने के बाद दोषी अनिल ने उसके सिर में डंडा मारकर और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। 15 अक्टूबर को बच्ची का शव बरामद हुआ था, जबकि दोषी को पांच दिन बाद पुलिस ने 19 अक्टूबर को बिहार के घनसोई गांव से गिरफ्तार किया था।
जनवरी 2019के अंतिम सप्ताह में मामले में सुनवाई शुरू हुई थी। पुलिस ने 23 दिन बाद 4 नवंबर को चालान पेश किया था और 108 दिन बाद आरोप तय किए गए थे।
अदालत ने उसे धारा 302 में फांसी, 366 में दस साल,376 एबी में फांसी,377 में दस साल,201 में सात साल,पोक्सो-3 ए,पोक्सो-5 एम,पोक्सो-4,पोक्सो-6 और पोक्सो-8 में फांसी की सजा सुनाई थी।
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