राजन राज
स्थान – मीरगंज विद्यालय, जिला – बरेली, राज्य – उत्तरप्रदेश और देश – भारत। इस पते को जरूर याद रखिएगा क्योंकि इस विद्यालय में काम कर रहे सभी लोग द्वापर या त्रेता युग में रहते हैं। यहां बाबा साहब द्वारा रचित संविधान नहीं मनुस्मृति का कानून चलता है।
इस विद्यालय में दलित छात्रों के लिए अलग से बर्तन है। उन्हें खाना अलग से दिया जाता है बोले तो सवर्ण बच्चों के साथ खाना महापाप है। यहां बच्चों को मिड-डे मील देने के दौरान ब्लॉक के अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के सामने ही जातीय भेदभाव का यह मामला सामने आया है। उन्होंने अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेजी है।
दरअसल हुआ ये कि मीरगंज ब्लॉक में गणित के अकादमिक रिसोर्स पर्सन शैलेंद्र कुमार सिंह मंगलवार को मॉनिटरिंग के लिए कपूरपुर विद्यालय आए हुए थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि मिड डे मील का वितरण हो रहा था। उन्होंने देखा कि सामान्य जाति के बच्चों और एससी बच्चों की भोजन की थाली और गिलास अलग-अलग स्थान से दिए जा रहे थे।
पूछने पर प्रधानाध्यापक ने बताया कि एससी बच्चों की भोजन थाली तथा दूध के गिलास अलग रखे जाते हैं। स्कूल की स्थिति देखकर यह सहज पता चल रहा था कि यहां भोजन देने में जातिगत आधार पर भेदभाव किया जाता है। इससे बच्चों के मन पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
शैलेंद्र की यह रिपोर्ट अधिकारियों के पास आते ही हड़कंप मच गया। इसके तुंरत बाद इस मामले के संदर्भ में शैलेंद्र कुमार एक रिपोर्ट बनाया कि कैसे विद्यालय में जातिगत भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने रजिस्टर पर सहयोगात्मक सुझाव भी लिखे। इस रजिस्टर पर प्रधानाध्यापक ने हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया।
इसके बाद मैंने अपने हस्ताक्षर से इस आख्या को प्रेरणा गुणवत्ता ऐप पर अपलोड कर दिया। यह देखकर प्रधानाध्यापक ने उस पेज को मेरे सामने ही फाड़ दिया और मुझे विद्यालय से जाने को कहा। जिस देश में आजादी के 70 साल बाद भी अगर किसी इंसान के साथ ऐसा भेदभाव किया जा रहा है तो क्यो समझा जाए ?
मुझें नहीं लगता कि इस देश के सवर्ण तबका गलत है। वो इस देश के 85 फीसदी जनता के साथ जो व्यवहार करती है उसमें सिर्फ और सिर्फ हमारी गलती है। हम भूल जाते हैं कि उनके ग्रंथों ने उनका साफ-साफ बता दिया है कि कोई भी बहुजन इसांन है ही नहीं।
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