
अयोध्या के राम मंदिर बाबरी मस्जिद मामले में अब सभी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है. उम्मीद है कि शीर्ष अदालत 15 नवंबर तक अपना फैसला सुना देगी. इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों.
Demolition of Babri Masjid was a violation of the Rule of Law.
मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों। बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था। @asadowaisi pic.twitter.com/u9sa3Z0ShD— AIMIM (@aimim_national) October 18, 2019
उन्होंने कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था. ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अपने ट्विटर हैंडल पर ओवैसी के भाषण का वीडियो अपलोड किया है, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं, ”जब 1986 में बाबरी मस्जिद के ताले खोले गए थे तो कांग्रेस की सरकार थी. कौन था वो मिनिस्टर जब मस्जिद शहीद हुई थी? जब ताले खोले गए तो किसकी हुकुमत थी. ये आपको (सामने खड़ी भीड़ से) याद रखना है. अल्लाह से दुआ करो कि अल्लाह इस फैसले से मुल्क में इंसाफ को कायम कर दे.”
बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की संवैधानिक पीठ ने बुधवार को अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी की. पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है.
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