मीडिया की गलतखबर: 2015 की तस्वीर हैदराबाद मुठभेड़ की बताकर साझा

6 दिसंबर की भोर सुबह को, एक खबर सामने आयी कि हैदराबाद बलात्कार और हत्या मामले के सभी आरोपियों को अपराध के घटनास्थल के नज़दीक पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। इसके बारे में आगे रिपोर्ट करते हुए समाचार चैनलों ने मुठभेड़ के स्थान को दर्शाने के दावे से एक तस्वीर प्रसारित की।

उपरोक्त तस्वीर ज़ी न्यूज़ के प्रसारण के स्क्रीनशॉट की है, जहा चैनल ने फ़्लैश करते हुए लिखा, ‘ज़ी न्यूज़ पर सबसे पहले’ (अनुवाद)। इसके साथ एंकर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, “यह तस्वीर हम आपको दिखा रहे है देखिये लेटेस्ट तस्वीर उस एनकाउंटर की, इन दरिंदो को ढेर करने के बाद, यह तस्वीर ज़ी न्यूज़ आपको दिखा रहा है।”

प्रमुख गुजराती समाचार चैनल TV9गुजराती ने भी इस तस्वीर को ‘एक्सक्लूसिव’ बताकर प्रसारित किया।

इस तस्वीर को हैदराबाद एनकाउंटर का तस्वीर बताकर प्रसारित करने वालों में अन्य मीडिया संगठन – जैसे कि तेलुगु समाचार न्यूज़ चैनल ABN तेलुगु ,TV9भारतवर्ष भी शामिल है।

सोशल मीडिया पर भी समान दावे किये गए है।

तथ्य जांच: 2015 की तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि प्रसारित तस्वीर हैदराबाद के हालिया मुठभेड़ को नहीं दर्शाती है। इस तस्वीर को 2015 में प्रकाशित किया गया था। फोटो

तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर, ऑल्ट न्यूज़ को अप्रैल 2015 में द हिन्दू द्वारा प्रकाशित एक लेख मिला, जिसका शीर्षक है, ‘तेलंगाना में एपी पुलिस ने 20 लक्कड़हारो पर बन्दुक तानी।’ (अनुवाद) लेख के अनुसार, इन लोगों को तिरुमला पहाड़ियों के नीचले हिस्से में शेषचलम जंगल में एक कथित मुठभेड़ में मार गिराया था, जहां पर पुलिस ने उन्हें लाल चन्दन के पेड़ को काटते हुए पाया था।

प्रसारित तस्वीर 2015 की है। हालांकि, इस वास्तविकता ने किसी भी समाचार चैनल को इसे ‘एक्सक्लूसिव’ या ‘पहली’ तस्वीर दिखाने से नहीं रोका। इसकी पड़ताल पहले बूम द्वारा की जा चुकी है।

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