बाबरी मस्जिद: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले का सुन्नी वक्फ़ बोर्ड करेगी समर्थन!

बाबरी मस्जिद: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले का सुन्नी वक्फ़ बोर्ड करेगी समर्थन!

अयोध्या मामले में पुर्नविचार याचिका दाखिल करने को लेकर उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड में मतभेद उजागर होने के बाद बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूखी ने नरमी दिखाते हुये कहा कि बोर्ड के सदस्य 26 नवम्बर को होने वाली बैठक मे अपने विचार रखने के लिये स्वतंत्र है।

डेली न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, फारूखी ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि उच्चतम न्यायालय के समक्ष पुर्नविचार याचिका दाखिल करने का फैसला लेने के लिये वह अधिकृत है लेकिन 26 तारीख को होने वाली बोर्ड की बैठक में हर सदस्य इस संबंध में अपनी राय बेबाकी से पेश करने के लिये स्वतंत्र है।

उन्होने कहा कि अयोध्या मामले में पुर्नविचार याचिका को लेकर बोर्ड में कोई मतभेद नहीं है।

उनके विचार से पुर्नविचार याचिका दाखिल करने का कोई औचित्य नहीं है लेकिन फिर भी बोर्ड किसी भी मामले में सर्वसम्मति से फैसला लेता है और इस नाते हर सदस्य को इस मसले पर अपना पक्ष रखने का अधिकार है जिस पर विचार करने के बाद बोर्ड अंतिम फैसला करेगा।

बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि हालांकि उन्हे इस बारे में अंतिम फैसला लेने का अधिकार है। इसके बावजूद अगर कोई विवाद होता है तो ज्यादा मतों के आधार पर निर्णय किया जायेगा।

इस बात का खास ध्यान रखा जायेगा कि सदस्यों के बीच टकराव के हालात नहीं बने।

गौरतलब है कि इससे पहले बोर्ड के आठ में से दो सदस्यों ने श्री फारूखी के पुर्नविचार याचिका नही दाखिल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य अब्दुल रज्जाक ने कहा ‘बगैर बोर्ड की बैठक के चेयरमैन एकतरफा फैसला कैसे ले सकते हैं। यह उनका निजी नजरिया हो सकता है लेकिन 26 को बोर्ड की बैठक के बाद ही इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जायेगा।’

एक अन्य सदस्य इमरान मसूद खान ने पुर्नविचार याचिका की वकालत करते हुये कहा ‘अगर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड उच्चतम न्यायालय में पुर्नविचार याचिका दाखिल करने जा रहा है तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का भी फर्ज बनता है कि मुस्लिम समुदाय की भावनाओं की कद्र करते हुये वह उसका समर्थन करे।

इस मुद्दे पर हालांकि बोर्ड के तीन सदस्य अबरार अहमद, मोहम्मद जुनैद सिद्दिकी और अदनान फारूख शाह फारूकी के साथ हैं।

बोर्ड के अधिकांश सदस्यों का मानना है कि बोर्ड को मस्जिद के लिये पांच एकड़ जमीन के प्रस्ताव को ठुकरा देना चाहिये। 26 नवम्बर की बैठक में इस बारे में भी अंतिम फैसला लिया जायेगा

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