जानिए, कश्मीर में कैसा है मौजूदा हालात?, लोगों के लिए रेडियो कैसे कर रही है काम?

जानिए, कश्मीर में कैसा है मौजूदा हालात?, लोगों के लिए रेडियो कैसे कर रही है काम?

प्राथमिक स्कूलों के बाद अब बुधवार को वादी में बंद पड़े मिडिल स्कूल भी खोल दिए गये। सप्ताह के अंत तक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की दैनिक गतिविधियों और वादी के हालात की समग्र समीक्षा के बाद अन्य सभी स्कूलों को भी खोला जा सकेगा। यह जानकारी राज्यपाल के प्रमुख सचिव वित्तायुक्त रोहित कंसल ने दी।

उन्होंने कहा कि अधिकांश इलाकों से दिन की निषेधाज्ञा हटा दी है। सामान्य जनजीवन रफतार पकड़ रहा है। घाटी के सभी एटीएम सुचारु हैं। बीते 12 दिन में 734 एटीएम पर 800 करोड़ की निकासी हुई है।

लोग आराम से पैसा निकलवा रहे हैं और खर्च कर रहे हैं। मतलब साफ है कि कश्मीर में हालात सामान्य हैं। दुकानें खुली और लोग खरीददारी कर रहे हैं।

वहीं, उन्होंने कहा कि घाटी के सरकारी कार्यालयों में उपस्थित बेहतर रही और अब अंतर जिला परिवहन सुविधा भी शुरू हो गई है। रोहित कंसल ने बताया कि करीब 14 दिन के बाद सोमवार को वादी में प्राथमिक स्कूल खोले थे।

कल भी यह स्कूल खुले। सोमवार की अपेक्षा मंगलवार को छात्रों व स्टाफ की उपस्थिति ज्यादा रही है। समाज के विभिन्न वर्गो के आग्रह और फीडबैक के आधार पर बुधवार को मिडिल स्कूल भी खोलने का फैसला किया। यह स्कूल उन्हीं इलाकों में खोले जाएंगे जहां प्राथमिक स्कूल खुले थे।

राज्यपाल के प्रमुख सचिव ने बताया कि पूरी रियासत में 96 हजार लैंडलाइन हैं। इनमें से 73 हजार को बहाल किया गया है।

वादी में विशेषकर श्रीनगर शहर में लाल चौक और इसके साथ सटे इलाकों में लैंडलाइन बंद होने पर उन्होंने कहा कि बीएसएनएल इस संदर्भ में पेश आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर कर रहा है, लेकिन अधिकांश जगह फोन सेवा बहाल हो चुकी है।

रोहित कंसल ने कहा पूरे जम्मू कश्मीर में 197 पुलिस थाना क्षेत्र हैं। इनमें से 136 के कार्याधिकार क्षेत्र में दिन की निषेधाज्ञा हटा ली है। सिर्फ वादी में ही 111 थाने हैं और इनमें से 50 थानों में बीते दो दिन के दौरान किसी तरह की दिन की निषेधाज्ञा नहीं थी।

जागरण डॉट कॉम के अनुसार, अन्य इलाकों में भी पाबंदियों में राहत दी जा रही है। हालात की समीक्षा के आधार पर अन्य थाना क्षेत्रों में भी दिन की निषेधाज्ञा हटाई जा रही है। अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने से वादी में उत्पन्न हुई स्थित को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने संचार और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।

मगर खुद को देश दुनिया के घटनाक्रम से अपडेट रखने के लिए लोग रेडियो ट्यून कर रहे हैं। अधिकांश घरों में कमरे के किसी कोने में पड़े रहने वाले रेडियो की अहमियत फिर बढ़ गई है। इसके अलावा टेलीविजन देखकर भी लोग देश दुनियां की खबरों को जान रहे हैं।

इंटरनेट क्रांति ने रेडियो व टेलीविजन के श्रोताओं और दर्शकों को सोशल मीडिया से जोड़ दिया है। हर कोई सोशल साइट्स के जरिये ही देश-दुनिया से जुड़े रहते हैं।

मगर घाटी में बंद की गई इंटरनेट की सेवाएं बंद किए जाने से एक बार फिर लोगों ने रेडियो और टेलीविजन का रुख कर दिया है। लोग रेडियो और टेलीविजन को ऑन करके दिनभर देश-दुनिया की खबरों जान रहे हैं।

समीर बट्ट कहते हैं कि बीते 15-16 दिन से वादी में इंटरनेट बिल्कुल बंद पड़े हैं। हमारा न केवल दुनिया से संपर्क कट गया है, बल्कि बंदिशों के कारण आस-पड़ोस में क्या हो रहा है, इसका भी पता नहीं चल रहा।

ऐसे में हमारे पास सूचनाएं प्राप्त करने के लिए रेडियो व टेलीविजन ही विकल्प बचे हैं। इन दिन सुबह से शाम तक मैं रेडियो और टेलीविजन से ही सूचनाएं प्राप्त कर रहा हूं।

मंसूर नामक एक सरकारी कर्मचारी ने भी कहा कि आम दिन में रेडियो व टेलीविजन की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन जब इंटरनेट ही बंद हो गया तो इनकी उपयोगिता भी बढ़ गई। मेरे परिवार के लोग खुद को अपडेट रखने के लिए अपना पूरा समय रेडियो व टेलीविजन के सामने गुजार रहे हैं।

रेडियो कश्मीर स्टेशन हेड नवाज अहमद नेगरू ने भी कहा कि वर्तमान स्थित को भांप स्टेशन कमर्चारियों की कोशिश है कि वे लोगों को ज्यादा से ज्यादा सूचनाएं दे सकें। लोगों को रेडियो से पर्याप्त सूचनाएं दी जा रही हैं, ताकि इंटरनेट की कमी महसूस न हो।

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