
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना केआर फिरंगी महली का कहना है कि हर साल की तरह इस साल भी केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी दी जानी चाहिए, जिन पर सरकार की ओर से रोक न लगाई गई हो। उन्होंनें सड़कों पर कुर्बानी को लेकर भी अहम बयान दिया है। महली ने अपील की है कि कुर्बानी सिर्फ घरों और मदरसों में दी जाए ताकि दूसरे समुदाय के लोगों को दिक्कत ना हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान कोई फोटो ना खींची जाए और सोशल मीडिया पर भी ऐसी तस्वीरें शेयर नहीं की जानी चाहिए।
बता दें कि मुसलमानों के अलग अलग संगठनों के महासंघ ‘यूनाटेड मुस्लिम फोरम’ ने मुस्लिम समुदाय को सलाह दी थी कि वह अन्य समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बकरीद के मौके पर गाय की कुर्बानी नहीं दें। फोरम ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि ईद-उल-अज़हा या बकरीद के मौके पर सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए तेलंगाना सरकार से उपाय करने की भी गुजारिश की थी।
बता दें कि ईद-उल-अज़हा का त्यौहार 12 अगस्त को मनाया जा सकता है। संगठन ने तेलंगाना सरकार से स्वयंभू गो रक्षकों की ओर से ‘गो रक्षा’ के नाम पर हिंसा के खिलाफ भी कदम उठाने का आग्रह किया है। फोरम ने सरकार से अलग अलग समुदायों के बीच किसी भी तरह के तनाव, भीड़ हत्या (लिचिंग) और जन हानि को रोकने के लिए भी कदम उठाने का अनुरोध किया।
फोरम ने कहा कि बकरीद पर भेड़, बकरा एवं भारतीय कानून में जिन जानवरों की कुर्बानी की इजाज़त है, उनकी कुर्बानी दी जा सकती है। फोरम ने कहा कि नागरिकों की जान एवं संपत्ति की हिफाज़त करने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकारों को कानून बनाने चाहिए।
पिछली साल सीएम योगी ने बकरीद से पहले जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि इसे परंपरा के मुताबिक ही मनाया जाना चाहिए और कुर्बानी के बाद बचे अवशेष को नाली में ना बहाया जाए। सीएम योगी के इस बयान के बाद फिरंगी महली ने भी कहा था कि कुर्बानी में इस्तेमाल जानवरों का खून सड़क पर न फेंका जाए।
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