
दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि हमें केंद्र सरकार की सारी शर्तें मंजूर हैं। इस वक्त हमारा केवल एक ही मकसद है कि दिल्ली में कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को किस तरह से पक्की सड़कें और पक्की रजिस्ट्री दिलवाई जाए। जब तक ये नहीं हो जाता तब तक मैं चैन की सांस नहीं लूंगा।
दिल्ली की सभी कच्ची कालोनियों में हम पक्की सड़कें, नाली, सीवर और पानी का काम करवा रहे हैं। मुझे बेहद खुशी है कि केंद्र सरकार ने कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का निर्णय ले लिया है। पूरा मसौदा बनकर तैयार हो गया है। केंद्र सरकार भी तेजी दिखा रही है और हम लोग भी तेजी दिखा रहे हैं। बहुत जल्द दिल्ली की कच्ची कालोनियों में रहने वाले लोगों को उनका सम्मान और उनका हक मिल जाएगा।
दिल्ली सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, “हमारी फरवरी, 2015 में सरकार बनी थी, उसके चंद महीने बाद नवंबर, 2015 में कैबिनेट से प्रस्ताव पारित करके 12 नवंबर, 2015 को केंद्र सरकार को दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का प्रस्ताव भेजा था। हमारे प्रस्ताव की कई बातें उन्होंने मान लिया है। उन्होंने हमारे कमेंट्स के लिए फाइनल प्रस्ताव हमारे पास भेजा है। हमारे लिए दिल्ली में कच्ची कॉलोनियों को पक्का करना इस वक्त हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के साथ अभी तक अन्याय हुआ है। उनको तिरस्कार की दृष्टि से देखा गया है। केंद्र सरकार का एक हफ्ते पहले प्रस्ताव आया था। हमें उसका जवाब देने के लिए 15 दिन का वक्त दिया गया था। हमने 7 दिन के अंदर हमने अपने कमेंट्स भेज दिये हैं। मोटे-मोटे तौर पर हमने केंद्र सरकार की सारी बातें मान ली हैं। सारी शर्तें मान ली हैं। लेकिन हमने केंद्र सरकार को कुछ सुझाव दिये हैं।“
मुख्यमंत्री ने कहा, “अभी पहले चरण में 1797 कालोनियों को पक्का किया जा रहा है। इनको तीन कैटिगरी में बांटा जा रहा है। पहली कैटिगरी सरकारी जमीन। दूसरी कैटिगरी खेती वाली जमीन। तीसरी कैटिगरी है निजी जमीन। पहली और दूसरी कैटिगरी में मालिकाना हक उसको दिया जाएगा जो अभी ऑक्युपेंट है। उसको जमीन का कुछ पैसा और पेनाल्टी देनी पड़ेगी। प्राइवेट लैंड में जमीन का पैसा नहीं देना होगा, केवल पेनाल्टी देना पड़ेगा। उसको मालिकाना हक मिल जाएगा। एक अड़चन ये आ रही थी कि 11 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट का एक ऑर्डर आया था कि अब जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल इत्यादि मान्य नहीं होंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट के इस ऑर्डर लागू किया जाए तो 2011 के बाद जिन लोगों ने जीपीए के जरिये जमीनें खरीदीं उन पर ये लागू नहीं हो पाएगा। इस कंडीशन को माफ जा रहा है। 11 अक्टूबर, 2011 के बाद भी जो जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल हुए, और इस तरह के जितने भी एग्रीमेंट हुए, वो तब तक के लिए मान्य होंगे, एक तारीख तय कर लिया जाएगा, उस तारीख तक मान्य माने जाएंगे। उसी के आधार पर मालिकाना हक चिह्नित किया जाएगा।“
श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कच्ची कॉलोनियों में जितने लोगों ने घर ले रखे हैं, प्लाट ले रखे हैं, सब बार-बार जीपीए पर बिके हैं, एक ने लिया, फिर दूसरे ने लिया, फिर तीसरे ने लिया, अब दिल्ली सरकार बीच में जितनी भी खरीद-फरोख्त हुई, उन सबकी स्टाम्प ड्यूटी माफ कर देगी। अब जिसके पास है, उनसे स्टाम्प ड्यूटी लेकर मालिकाना हक दे दिया जाएगा।“
मुख्यमंत्री ने कहा, “इसको दो चरण में नियमित किया जा रहा है। पहले चरण में 1797 कॉलोनियां हैं। केंद्र सरकार ने लिखा है कि 1 जनवरी, 2015 तक 1797 के अलावा भी अगर कोई कॉलोनी बच गई है तो दिल्ली सरकार उसकी लिस्ट बना ले। हमारा ये कहना है कि अगर 1 जुलाई, 2019 तक ऐसा कर लिया जाए तो बेहतर होगा। हमारा सुझाव है कि 1 जुलाई, 2019 तक 1797 कॉलोनियों के अलावा जितनी कॉलोनियां बच जाती हैं, उनकी भी लिस्ट बना ली जाए और उनको दूसरे चरण में नियमित कर दिया जाए।“
श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली के जितने ग्रामीण गांव हैं, उनमें जितनी भी कच्ची कालोनियां हैं, दिल्ली सरकार उनको नोटिफाई करके शहरी गांव घोषित कर देगी। दिल्ली देहात के गांवों को इससे बहुत राहत मिलेगी। सेक्शन 81 के तहत कृषि योग्य भूमि पर गैर-कृषि काम हो रहा है, तो सरकार उसको अपने कब्जे में लेकर ग्राम सभा को दे देती है। सेक्शन 81 के हजारों केस चल रहे हैं। सारे केस वापस ले लिये जाएंगे। हजारों लोगों को इससे राहत मिलेगी। केंद्र सरकार ने कच्ची कालोनियों के मामले में डेवलपमेंट कंट्रोल नॉर्म्स को काफी उदार बनाने की बात कही है। केंद्र सरकार का ये सुझाव बहुत अच्छा है। श्री हरदीप पुरी जी ने कहा कि एक महीने के अंदर केंद्र सरकार इसका ऑर्डर कर देगी। जिस दिन केंद्र सरकार ऑर्डर करेगी, उसके बाद तीन महीने के अंदर डीडीए उसके रेगुलेशंस पास कर देगी। इसके नक्शे डीडीए तीन महीने के अंदर बना देगी।“
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने केंद्र सरकार को 12 सुझाव भेजे हैं। ये हमारे सुझाव हैं। केंद्र सरकार जो सुझाव मानना चाहे, वो माने, जो ना मानना चाहे, उनकी मर्जी है। हम चाहते हैं कि ये स्कीम जल्दी से जल्दी लागू हो ताकि दिल्ली के लोगों को उनका हक मिल सके। केंद्र सरकार जो भी शर्तें लगाएगी, वो हमको मान्य हैं।
1) केंद्र सरकार द्वारा 50% बिल्डअप एरिया वाली शर्त जो कि 1 जनवरी 2015 तक रखी गई है, उसे बढ़ाकर 31 मार्च 2019 तक कर दिया जाए।
2) 30 जून 2019 तक जितने लोगों ने अपनी जीपीए करा ली है, उन सभी जीपीए को वैध माना जाए और उसी के आधार पर मालिकाना हक दिया जाए।
3) 1 जुलाई 2019 तक जितनी कच्ची कॉलोनियां दिल्ली में बन चुकी हैं, उनकी एक सूची बनाकर दूसरे चरण में उन सभी को पक्का घोषित किया जाए।
4)भविष्य में दिल्ली में कोई नई कच्ची कॉलोनी बनती है तो संबंधित एसडीएम, एसएचओ एवं एमसीडी अधिकारी को बर्खास्त किया जाए।
5) तीन कॉलोनियों सैनिक फार्म, महेंद्रू एनक्लेव तथा अनंत राम डेरी केंद्र सरकार ने पक्का करने के दायरे से बाहर रखी हैं, यह आर्टिकल 14 का उल्लंघन है। इन तीनों कॉलोनियों को भी अन्य कॉलोनियों के साथ रेगुलराइज किया जाए।
6) इन कॉलोनियों को रेगुलराइज करते समय जो ज़मीन की और पेनाल्टी की कीमत अदा करनी होगी, उसके लिए बैंक से लोन की सुविधा की जाए ताकि गरीब लोग आसानी से इस राशि को जमा करा सकें।
7) डीडीए के नक्शे बनाने का इंतजार करने की बजाय, विभिन्न आरडब्ल्यू और दिल्ली सरकार के जीएसडीएल विभाग द्वारा सेटेलाइट के जरिये बनाए गए मौजूदा नक्शों के आधार पर तुरंत रजिस्ट्रियां खोल दी जाएं।
8) यमुना बांध के अंदर जो कॉलोनियां आ रही हैं उन्हें रेगुलराइज ना किया जाए। यमुना बांध के बाहर वाली कॉलोनियों को रेगुलराइज कर दिया जाए।
9) इन कच्ची कॉलोनियों में जो सरकारी जमीनें हैं वह दिल्ली सरकार को द्वितीय कैटेगरी के मूल्य पर स्कूल, अस्पताल एवं अन्य सुविधा की चीजें बनाने के लिए हस्तांतरित कर दी जाएं।
10) कच्ची कॉलोनियों को नजदीकी कालोनियों में जो सबसे निम्न स्तर की कैटेगरी की कॉलोनी है उससे भी नीचे माना जाए।
11) जिन कालोनियों में फॉरेस्ट का पैच, एएसआई का पैच है, उसको छोड़कर बाकी कॉलोनी को रेगुलराइज़ कर दिया जाए।
12) इन कच्ची कॉलोनियों में लोगों ने दुकानें भी खोल रखी हैं, इन कालोनियों की जमीन को “मिक्स यूज़ लैंड” घोषित किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज तक सभी सरकारों ने कच्ची कॉलोनियों के साथ केवल और केवल राजनीति की। सभी ने कच्ची कॉलोनियों को तिरस्कार की नजरों से देखा। ये पहली सरकार है जो इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सम्मान और न्याय दिलाने की कोशिश कर रही है।
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