उन्नाव रेप मामला: कोर्ट ने BJP के पूर्व MLA कुलदीप सिंह सेंगर को दिया दोषी करार, शशि सिंह को किया बरी

नई दिल्ली: उन्नाव रेप मामले (Unnao Rape Case) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को दोषी करार दिया है. वहीं, शशि सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया. सेंगर पर अपहरण और हत्या समेत कई मामले दर्ज हैं. केस की सुनवाई खत्म होने के बाद जिला जज धर्मेश शर्मा ने कहा था कि वह 16 दिसंबर को अपना फैसला सुनाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था. ट्रांसफर होने के बाद 5 अगस्त से रोजाना इस मामले की सुनवाई हो रही थी. 17 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर बहस होगी.

रेप और पॉक्सो एक्ट में दोषी
कुलदीप सिंह सेंगर को रेप(376) और पॉक्सो एक्ट में दोषी ठहराया है. अभी 3 और मामलों में दिल्ली की विशेष सीबीआई कोर्ट में ट्रायल चल रहा है. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता वारदात के वक्त नाबालिग थी. उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट हुआ. पीड़िता डरी हुई थी और उसके परिवार को जान का खतरा था. वो पावरफुल पर्सन से लड़ रही थी. पीड़ित के परिवार पर फर्जी केस लगाए गए. सीबीआई ने गैंगरेप केस में चार्जशीट पेश करने में 1 साल लगा दिया. सीबीआई पर भी जज ने सवाल खड़े किए. सीबीआई ने पीड़िता को बयान दर्ज करने के लिए कई बार बुलाया, जबकि सीबीआई को पीड़िता के पास जाना चाहिए था. 

क्या था मामला?
कुलदीप सेंगर ने 2017 में एक युवती का कथित तौर पर अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया था. उस समय युवती नाबालिग थी. यूपी की बांगरमऊ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने सेंगर को इस मामले के बाद अगस्त 2019 में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था. अदालत ने 9 अगस्त को विधायक कुलदीप सेंगर और शशि सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, बलात्कार और पोक्सो कानून से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे.

पीड़िता की कार को ट्रक ने मारी थी टक्कर
कुलदीप सेंगर पर आरोप लगाने वाली युवती की कार को 28 जुलाई में एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी. दुर्घटना में युवती की दो रिश्तेदार मारी गईं और उसके परिवार ने इसमें षड्यंत्र होने के आरोप लगाए थे. उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार मामले में दर्ज सभी पांच मामलों को एक अगस्त को यूपी में लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करते हुए निर्देश दिया कि रोजाना आधार पर सुनवाई की जाए और इसे 45 दिनों के अंदर पूरा किया जाए.

कोर्ट ने यह व्यवस्था पीड़िता द्वारा भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए दी थी. बलात्कार मामले में बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के नौ गवाहों से जिरह हुई. बलात्कार पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए यहां स्थित एम्स अस्पताल में एक विशेष अदालत भी बनाई गई. पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से हवाई एंबुलेन्स के जरिये दिल्ली ला कर यहां भर्ती कराया गया था. उच्चतम न्यायालय के आदेशों पर युवती और उसके परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी गई है.

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