ईद-उल-अजहा के मौके पर कश्मीर में ढील मगर मस्जिदों में ज्यादा भीड़ की इजाजत नहीं!

ईद-उल-अजहा के मौके पर कश्मीर में ढील मगर मस्जिदों में ज्यादा भीड़ की इजाजत नहीं!

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद सियासी बवाल और हंगामे के बीच घाटी ईद-अल-अजहा का जश्न मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कश्मीर में ईद-अल-अजहा या बकरीद सोमवार को मनाई जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास मौके पर राज्य में लगीं पाबंदियों पर ढील दी गई है, ताकि लोग पूरे उत्साह के साथ त्योहार मना सकें। आपको बता दें कि ईद-उल-अजहा से पहले रविवार को बैंक, एटीएम और कुछ बाजार खुले रहे और तमाम प्रतिबंधों में ढील दी गई ताकि लोगों को त्योहार की खरीदारी करने में आसानी हो।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बकरीद को ध्यान में रखते हुए श्रीनगर शहर में 6 मंडी/बाजार बनाए गए हैं और लोगों के लिए 2.5 लाख भेड़ें उपलब्ध कराई गईं हैं। लोगों के घरों तक सब्जियां, गैस सिलिंडर, मुर्गे-मुर्गियां और अंडे आदि पहुंचाने के लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है।

इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, अनुच्छेद 370 पर 5 अगस्त को हुए फैसले के बाद से घाटी में संचार संपर्क सीमित होने की पृष्ठभूमि में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल प्रशासन ने 300 विशेष टेलीफोन बूथ लगाने को कहा है ताकि लोग अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों से बातचीत कर सकें।

प्रशासन ने सोमवार को अलग-अलग इलाकों की स्थानीय मस्जिदों में ईद की नमाज के लिए अनुमति दी है। हालांकि घाटी की बड़ी मस्जिदों में ज्यादा संख्या में लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है। प्रशासन को शक है कि आसमाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

आपको बता दें कि आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को संसद द्वारा निरस्त किए जाने के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती, प्रतिबंधों और संचार संपर्क सीमित किए जाने के कारण कश्मीर घाटी में त्योहार की चहल-पहल नजर नहीं आ रही है।

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