
सोनभद्र व संभल के मामले को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को पूरी तरह घेरने की कोशिश की। विपक्ष दलों ने आरोप लगाया कि कानून व्यवस्था बदतर हो गई है और केवल विरोधी दलों के नेताओं आजम खां, प्रियंका गांधी, बसपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार पर ही कार्रवाई हो रही है। विधानसभा अध्यक्ष को हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को कई बार थोड़े थोड़े समय के लिए स्थगित करना पड़ा।
नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने कहा कि आजम खां पर 13 मुकदमे लाद कर उन्हें सरकार ने भूमाफिया बना दिया। आजम खां के बहाने अल्पसंख्यकों को डराया जा रहा है। ईवीएम से मिली जीत के कारण भाजपा सत्ता के नशे में चूर है। सरकार सपा व दूसरे विरोधी दलों का डराना चाहती है। और सदन भी मनमाने तरीके से चलाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष सरकार को अलोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा नहीं चलाने देगा।
रामगोविंद चौधरी की मंत्री सतीश महाना व सुरेश खन्ना से भी नोकझोंक हुई। सदन में शोर शराबा बढ़ने पर अध्यक्ष ने सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की। पर जब बात नहीं बनी तो सदन 12:47 पर 15 मिनट के लिए स्थगित हुआ। इसके बाद 15 मिनट का स्थगन का समय तीन बार और बढ़ाया गया।
सदन जब दुबारा बैठा तो बसपा के लालजी वर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पूर्व मंत्री व सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सोनभद्र मामले में सरकार की कार्रवाई का वह स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि वह जमीन पीड़ित परिवार के नाम कर दे।
अराधना समेत कांग्रेस सदस्य वेल में
कांग्रेस की अराधना मिश्रा ने कहा कि घटना का इतना वक्त बीत जाने के बाद भी सरकार को कोई मंत्री घटनास्थल नहीं गया जब पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी पीड़ितों के आंसू पोछने सोनभद्र रवाना हुईं तो उन्हें जाने नहीं दिया रास्ते में रोक कर गिरफ्तार कर लिया। यह घटना बिहार के बहुत पुराने बेलची कांड जैसी है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। विरोधस्वरूप में कांग्रेस सदस्य वेल में आ गए और बाद में सदन से वाकआउट कर गए।
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