
अयोध्या मामले पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की दिल्ली में आयोजित बैठक में जमीयत प्रमुखत मौलाना अरशद मदनी ने असम एनआरसी की चर्चा करते हुए कहा कि वे एनआरसी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए।
डेली न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस वक्त जो मुल्क के अंदर है, उसमें सबसे बड़ा मुद्दा बाबरी मस्जिद का है, जिसमें अब फैसला आना है। अभी असम में एनआरसी का मुद्दा था, जिसमें हमने बड़ी लड़ाई लड़ी है।
उन्होंने कहा कि हम एनआरसी के मुखालिफ नहीं हैं, लेकिन यह धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। हम चाहते हैं कि यह सबूत के आधार पर तय हो, लेकिन यह नहीं कि एक के सबूत को देखिए और दूसरे के सबूत को नहीं। एनआरसी पूरे मुल्क में कीजिए लेकिन फिरकापरस्ती पर नहीं।
एनआरसी मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि उनके निशाने पर सिर्फ मुस्लिम हैं और माननीय गृहमंत्री की सोच संविधान की धारा चौदह-पंद्रह के विरुद्ध है, जिसमें सभी धर्मों को उनकी धार्मिक भाषा, खानपान, रहन सहन के नाम पर किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं करने की बात की है। उन्होंने कहा कि गैर मुस्लिम सभी धर्मों को भारतीय नागरिकता देने की बात शर्मनाक है।
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