
नरेन्द्र माेदी की सरकार की ओर से एनआरसी मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जवाब दिया।
खास खबर डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी चाहिए, इसीलिए नागरिकता संशोधन विधेयक की आवश्यकता है, ताकि पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल सके। आपको बताते जाए कि अमित शाह ने इस दौरान मुसलमानों का नाम नहीं लिया।
अमित शाह ने आगे यह भी कहा कि देश भर में एनआरसी चलाया जाएगा। कोई भी, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, उसे चिंतित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनआरसी के तहत सभी को लाने की यह एक प्रक्रिया है।
असम एनआरसी पर बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिन लोगों के नाम एनआरीसी सूची में नहीं वे ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं। पूरे असम में ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। यदि किसी के पास ट्रिब्यूनल में जाने के लिए पैसा नहीं है, तो असम सरकार उसके लिए वकील नियुक्त करने का खर्च उठाएगी।
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