
संघ को टक्कर लेने के लिए कांग्रेस ने नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपना काम आरंभ कर दिया है
भाजपा के लिए वैचारिक जमीन तैयार करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने वैचारिक मोर्चाबंदी पर कदमताल तेज कर दी है।
पार्टी गांधीवादी विचार को जन-जन का विचार बनाने की कोशिश में जुट गई है। आगामी समय में संघ के प्रचारकों की तरह कांग्रेस के प्रशिक्षित कार्यकर्ता गांधी के विचार का प्रचार करते नजर आएं तो अचरज नहीं होगा। मौजूदा दौर की राजनीति में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी विचारधारा को जनता की विचारधारा बनाने की है।
पार्टी की जनता से दूरी बढ़ी और उसी का नतीजा है कि कांग्रेस का जनाधार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, उसके मुख्य विरोधी दल भाजपा का जनाधार तो बढ़ ही रहा है, साथ में उसकी जमीनी पकड़ भी मजबूत हो रही है। इसका कारण संघ है, जो भाजपा की राह आसान करने के लिए हिंदूवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में लगा है।
कांग्रेस की विचारधारा को महात्मा गांधी की विचारधारा का प्रतिबिंब माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस का मत है कि गांधी की विचारधारा के जरिए ही गोडसे और सावरकर की विचारधारा के अंतर को जनता के सामने लाकर जमीनी पकड़ मजबूत की जा सकती है।
कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो बीते साल के विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकारें बनने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की इच्छा जाहिर करते हुए राज्य प्रभारियों से पहल करने को कहा था।
पार्टी कार्यकर्ताओं को कैसे प्रशिक्षित किया जाएगा, इसके लिए मैशिगन बिजनेस स्कूल से एमबी की पढ़ाई कर लौटे कांग्रेस प्रशिक्षण विभाग के प्रमुख सचिन राव ने एक कार्ययोजना तैयार की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि उसमें पार्टी और गांधी की विचारधारा सर्वोपरि है, साथ में संघ से जुड़े रहे नेताओं की विचारधारा का तुलनात्मक अध्ययन भी इसमें मौजूद है।
कांग्रेस पूरी तरह इस प्रशिक्षण के जरिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की ऐसी फौज तैयार करना चाह रही है, जो कांग्रेस और गांधी को तो बेहतर तरीके से जाने ही, साथ में भाजपा और संघ को सीधे जवाब दे सके और उनकी सोच को उजागर कर सके।
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